क्रेडिट कार्ड होल्डर्स सावधान 1 अप्रैल से बदल रहे हैं 5 बड़े नियम रिवॉर्ड पॉइंट्स से लेकर एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस तक सब बदलेगा
News India Live, Digital Desk : अगर आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 1 अप्रैल से नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ क्रेडिट कार्ड से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव होने जा रहा है। ये बदलाव आपकी जेब और कार्ड के फायदों (Benefits) पर सीधा असर डालेंगे। बैंक अब रिवॉर्ड पॉइंट्स, लाउंज एक्सेस और ट्रांजैक्शन फीस को लेकर अपनी नीतियों को सख्त कर रहे हैं।
1. एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस (Airport Lounge Access) के बदले नियम
अब तक कई क्रेडिट कार्ड्स पर फ्री लाउंज एक्सेस मिलता था, लेकिन 1 अप्रैल से इसके लिए खर्च की शर्त (Spending Criteria) को बढ़ा दिया गया है। कई बैंकों ने अब नियम बनाया है कि आपको फ्री लाउंज एक्सेस तभी मिलेगा जब आपने पिछली तिमाही (Quarter) में कार्ड से कम से कम ₹35,000 से ₹50,000 तक का खर्च किया हो।
2. रिवॉर्ड पॉइंट्स (Reward Points) की कटौती
बैंक अब रेंट पेमेंट (Rent Payment), इंश्योरेंस प्रीमियम और सरकारी सेवाओं के भुगतान पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स को या तो बंद कर रहे हैं या बेहद कम कर रहे हैं। अगर आप क्रेडिट कार्ड से घर का किराया देते हैं, तो अब आपको पॉइंट्स नहीं मिलेंगे और साथ ही 1% का ट्रांजैक्शन चार्ज भी देना पड़ सकता है।
3. यूटिलिटी बिल पेमेंट पर कैपिंग (Capping on Utility Bills)
बिजली, पानी और गैस जैसे यूटिलिटी बिलों के भुगतान पर मिलने वाले कैशबैक या रिवॉर्ड पॉइंट्स पर अब एक सीमा (Limit) लगा दी गई है। उदाहरण के तौर पर, अब आप महीने में एक निश्चित राशि से ज्यादा का बिल भरने पर कैशबैक का लाभ नहीं ले पाएंगे। यह नियम खासतौर पर उन लोगों के लिए है जो बड़े बिलों का भुगतान क्रेडिट कार्ड से करते हैं।
4. फ्यूल सरचार्ज वेवर (Fuel Surcharge Waiver) में बदलाव
पेट्रोल और डीजल भरवाने पर मिलने वाले 'फ्यूल सरचार्ज वेवर' के नियमों को भी कई बैंक रिवाइज कर रहे हैं। अब कुछ कार्ड्स पर महीने की अधिकतम छूट की सीमा को कम कर दिया गया है। यानी अब आपको भारी फ्यूल खर्च पर पहले जैसा पूरा रिफंड नहीं मिलेगा।
5. लेट पेमेंट और फाइनेंस चार्ज में बढ़ोतरी
क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर न भरने वालों के लिए 1 अप्रैल से मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। कई बैंकों ने लेट पेमेंट फीस (Late Payment Fees) और बकाया राशि पर लगने वाले ब्याज (Finance Charges) को बढ़ाने का फैसला किया है। अब बिल मिस करना आपकी क्रेडिट रेटिंग और जेब दोनों के लिए अधिक महंगा साबित होगा।