Credit Card Alert : मिनिमम अमाउंट ड्यू भरने की आदत पड़ सकती है भारी ,समझें ब्याज का पूरा गणित और कर्ज का जाल
News India Live, Digital Desk : क्रेडिट कार्ड कंपनियाँ आपके बिल में दो विकल्प देती हैं 'टोटल ड्यू' और 'मिनिमम ड्यू'। कई लोग कैश की कमी या जानकारी के अभाव में सिर्फ मिनिमम ड्यू (आमतौर पर कुल बिल का 5%) भरकर निश्चिंत हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपकी वित्तीय सेहत के लिए 'जहर' के समान है?
1. क्या होता है 'मिनिमम अमाउंट ड्यू' (MAD)?
मिनिमम अमाउंट ड्यू वह न्यूनतम राशि है जिसे चुकाकर आप केवल लेट फीस (Late Fee) से बच सकते हैं। इसे चुकाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपके बाकी बचे हुए बिल पर ब्याज नहीं लगेगा।
2. भारी-भरकम ब्याज का गणित (The Calculation)
क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला ब्याज भारत में सबसे महंगा होता है (सालाना 36% से 48% तक)।
ब्याज मुक्त अवधि का खत्म होना: जैसे ही आप सिर्फ मिनिमम ड्यू चुकाते हैं, आपके कार्ड पर मिलने वाली 45-50 दिनों की 'इंटरेस्ट फ्री' अवधि खत्म हो जाती है।
नए खर्चों पर तुरंत ब्याज: इसके बाद आप कार्ड से जो भी नया ट्रांजेक्शन करेंगे, उस पर पहले ही दिन से भारी ब्याज लगना शुरू हो जाएगा।
3. उदाहरण से समझें (A Simple Example)
मान लीजिए आपका बिल ₹50,000 है और आपने सिर्फ ₹2,500 (मिनिमम ड्यू) चुकाया।
बकाया राशि: ₹47,500
ब्याज: अब इस ₹47,500 पर प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 3-4% मासिक ब्याज लगेगा।
नतीजा: अगले महीने आपका बिल पिछले महीने के ब्याज और नए खर्चों के साथ फिर से ₹50,000 के पार पहुंच जाएगा। यदि आप केवल मिनिमम ड्यू भरते रहे, तो ₹50,000 का यह कर्ज चुकाने में आपको 10 से 15 साल लग सकते हैं!
4. क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर
लगातार मिनिमम ड्यू चुकाने से बैंकों को संकेत मिलता है कि आप 'क्रेडिट हंग्री' हैं और कर्ज के दबाव में हैं। इससे आपका क्रेडिट स्कोर (CIBIL) खराब हो सकता है, जिससे भविष्य में होम लोन या कार लोन मिलने में कठिनाई होगी।
बचाव के तरीके (How to Avoid This Trap):
हमेशा 'Total Amount Due' चुकाएं: कोशिश करें कि बिल का पूरा भुगतान समय पर करें।
EMI का विकल्प चुनें: यदि आप पूरा पैसा नहीं दे पा रहे हैं, तो बकाया राशि को कम ब्याज वाली EMI में बदल लें। यह मिनिमम ड्यू भरने से कहीं ज्यादा सस्ता पड़ता है।
फिजूलखर्ची पर लगाम: अपनी चुकाने की क्षमता के अनुसार ही क्रेडिट कार्ड का उपयोग करें।