बस्तर में लाल आतंक का काउंटडाउन शुरू 2026 तक छत्तीसगढ़ होगा नक्सल मुक्त रडार पर 300 खूंखार माओवादी
News India Live, Digital Desk: गृह मंत्री अमित शाह के हालिया निर्देशों के बाद, सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और दक्षिण बस्तर के इलाकों में माओवादियों को घेरने की रणनीति तेज कर दी है। सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक राज्य को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाना है।
1. सुरक्षा बलों के रडार पर 300 माओवादी
सुरक्षा एजेंसियों ने एक 'हिट लिस्ट' तैयार की है जिसमें लगभग 300 सक्रिय माओवादियों के नाम शामिल हैं।
टॉप कमांडर: इस सूची में हिड़मा, देवजी और प्रभाकर जैसे बड़े नक्सली कमांडर शामिल हैं, जो बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों पर हमलों के मास्टरमाइंड रहे हैं।
रणनीति: इन नक्सलियों की लोकेशन ट्रैक करने के लिए ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग किया जा रहा है।
2. 'फॉरवर्ड बेस' रणनीति (Forward Linkage)
नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने के लिए सुरक्षा बलों ने 'LRP' (Long Range Patrol) और नए कैंपों की स्थापना तेज कर दी है:
अबूझमाड़ में घुसपैठ: जो इलाका कभी नक्सलियों का 'अभेद्य किला' माना जाता था, अब वहां सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित हो चुके हैं।
घेराबंदी: पिछले एक साल में रिकार्ड संख्या में नक्सली मुठभेड़ में मारे गए हैं, जिससे उनका कैडर बुरी तरह टूट चुका है।
3. गृह मंत्रालय की डेडलाइन: मार्च 2026
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है।
विकास बनाम विनाश: सरकार 'सुरक्षा और विकास' की दोहरी नीति पर काम कर रही है। जिन इलाकों को मुक्त कराया जा रहा है, वहां तुरंत सड़क, स्कूल और अस्पताल पहुँचाए जा रहे हैं।
सरेंडर पॉलिसी: नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए आकर्षक 'पुनर्वास नीति' का विकल्प भी दिया जा रहा है।
4. हालिया सफलता के आंकड़े
मुठभेड़: 2024-25 के दौरान सुरक्षा बलों ने 150 से अधिक इनामी नक्सलियों को ढेर किया है।
हथियार बरामदगी: भारी मात्रा में आईईडी (IED), ऑटोमैटिक राइफलें और नक्सली साहित्य बरामद किए गए हैं।
चुनौतियां अभी भी बाकी हैं:
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे नक्सली सिमट रहे हैं, वे अधिक हिंसक और हताश हो सकते हैं। मानसून के दौरान घने जंगलों में ऑपरेशन चलाना सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहती है।