यूपी में कफ सिरप माफिया का पर्दाफाश, ED ने बताया इतिहास में ऐसा कभी नहीं देखा

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News India Live, Digital Desk : प्रवर्तन निदेशालय यानी ED (Enforcement Directorate) ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे उत्तर प्रदेश प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि उन्होंने यूपी में खांसी की दवा (खासकर जिनमें नशा होता है) के अवैध व्यापार से जुड़े एक ऐसे रैकेट को पकड़ा है, जैसा उन्होंने प्रदेश के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा।

इसे सिर्फ दवा घोटाला कहना गलत होगा, यह एक बहुत बड़ा आर्थिक अपराध (Financial Fraud) है।

700 से ज्यादा 'भूतिया' कंपनियां (The Network of 700 Fake Firms)

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस धंधे को चलाने के लिए जालसाजों ने एक-दो नहीं, बल्कि 700 से ज्यादा फर्जी कंपनियां (Fake Firms) बना रखी थीं।

सुनने में यह किसी फ़िल्मी कहानी जैसा लगता है। इन शातिर लोगों ने कागजों पर ऐसी कंपनियां दिखाईं जिनका जमीन पर कोई वजूद ही नहीं था। न कोई ऑफिस, न कोई गोदाम, और न ही असली मालिक। इन फर्जी नामों का इस्तेमाल सिर्फ़ और सिर्फ़ काले धन को इधर से उधर करने और प्रतिबंधित कफ सिरप (जैसे कोडीन वाली सिरप) को अवैध तरीके से खपाने के लिए किया जा रहा था।

ED ने इसे "ऐतिहासिक फ्रॉड" क्यों कहा?

जांच अधिकारियों के मुताबिक, पैसे के लेनदेन का यह तरीका (Modus Operandi) इतना पेचीदा था कि शुरुआत में पकड़ में ही नहीं आया। अपराधी न केवल दवाई की तस्करी कर रहे थे बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा कर रहे थे।

ईडी का कहना है कि:

  • यह सिर्फ नशे का कारोबार नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित बैंकिंग फ्रॉड भी है।
  • गरीब और भोले-भाले लोगों के आधार कार्ड और पहचान पत्र का इस्तेमाल करके उनके नाम पर फर्जी फर्मे रजिस्टर कराई गईं और उन बेचारों को पता तक नहीं चला कि वो करोड़ों के मालिक हैं (कागजों में)।

यह रैकेट इतना खतरनाक क्यों है?

कफ सिरप का यह काला बाज़ार अक्सर युवाओं को नशे की लत लगाने के लिए इस्तेमाल होता है। यह दवाइयां जो असल में इलाज के लिए बनी हैं, तस्करी होकर गलत हाथों में पहुँचती हैं। इस खुलासे के बाद यह साफ़ हो गया है कि यह गिरोह सिर्फ स्वास्थ्य से नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था से भी खिलवाड़ कर रहा था।

ED ने अब इस पर शिकंजा कस दिया है। कोर्ट में दावा किया गया है कि इस मामले की तहें बहुत गहरी हैं और आने वाले दिनों में कई बड़े सफ़ेदपोश चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं।

तो अगली बार जब आप अखबारों में 'फर्जी कंपनियों' की खबरें पढ़ें, तो समझ जाइये कि उनके तार कहीं न कहीं ऐसे ही गहरे राज से जुड़े होते हैं। कानून के हाथ लम्बे हैं, और इस बार वो माफिया की गर्दन तक पहुँच चुके हैं।