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March 27 2026 04:12 am

ईरान युद्ध पर आज सर्वदलीय बैठक ,कांग्रेस की बड़ी मांग बैठक में खुद मौजूद रहें पीएम मोदी

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News India Live, Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग के बीच केंद्र सरकार ने आज यानी 25 मार्च 2026 को शाम 5 बजे एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई है। संसद भवन परिसर में होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य इस अंतरराष्ट्रीय संकट पर राष्ट्रीय सहमति बनाना और विपक्षी दलों को भारत की कूटनीतिक व आर्थिक तैयारियों से अवगत कराना है। हालांकि, बैठक से ठीक पहले कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति को लेकर मोर्चा खोल दिया है।

"औपचारिकता न बने बैठक" – कांग्रेस की सीधी मांग

कांग्रेस सांसद अमरेंद्र सिंह राजा वड़िंग ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि यह बैठक केवल एक औपचारिकता (Formality) है, तो इसे बुलाने का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वयं इस बैठक की अध्यक्षता करनी चाहिए। वड़िंग ने कहा:

"अगर सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है, तो प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से इसमें शामिल होना चाहिए। देश में बड़े फैसले 'दो दोस्तों' (मोदी-शाह) द्वारा लिए जाते हैं, तो फिर इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय आपदा पर चर्चा के दौरान पीएम की अनुपस्थिति क्या संकेत देती है? अगर वह मौजूद नहीं रहते, तो ऐसी बैठक का क्या मतलब?"

राजनाथ सिंह करेंगे अध्यक्षता, जयशंकर देंगे 'ब्रिफिंग'

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर विपक्षी नेताओं को ईरान संकट, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फंसे भारतीय जहाजों और वहां रह रहे करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा पर विस्तृत जानकारी देंगे। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों और सीडीएस (CDS) के साथ रक्षा तैयारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा की है।

राहुल गांधी नहीं होंगे शामिल, खड़गे ने उठाए सवाल

विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे, क्योंकि वे केरल में एक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में व्यस्त हैं। वहीं, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह संसद में इस मुद्दे पर पूर्ण चर्चा (Full Debate) से बच रही है। खड़गे ने कहा कि पीएम मोदी का सदन में दिया गया बयान केवल 'आत्म-प्रशंसा' से भरा था और उसमें जमीनी संकट जैसे एलपीजी की किल्लत और महंगाई पर कोई ठोस जवाब नहीं था।

भारत पर 'कोविड' जैसा संकट?

पीएम मोदी ने हाल ही में राज्यसभा में इस युद्ध की तुलना कोविड-19 के कालखंड से की थी और देश को लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहने को कहा था। सरकार ने ईंधन, उर्वरक और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को संभालने के लिए 7 अधिकार प्राप्त समूह (Empowered Groups) गठित किए हैं। विपक्ष का तर्क है कि अगर स्थिति इतनी गंभीर है, तो सरकार को अमेरिका और इजरायल के 'आक्रामक रुख' की निंदा करनी चाहिए और कूटनीतिक स्तर पर शांति के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए।

बैठक के मुख्य मुद्दे:

ऊर्जा सुरक्षा: ईरान से तेल और गैस आपूर्ति बाधित होने पर वैकल्पिक इंतजाम।

महंगाई पर लगाम: खाद और ईंधन की कीमतों को बढ़ने से रोकने की रणनीति।

भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों का सुरक्षित रेस्क्यू प्लान।

रणनीतिक रुख: अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान के युद्ध में भारत की तटस्थता या सक्रियता।