जनरल नरवणे की फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी पर घमासान,सरकार लाएगी सख्त नियम, अब आसान नहीं होगी यादें लिखना

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News India Live, Digital Desk: पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब ने न केवल संसद में हंगामा खड़ा किया है, बल्कि देश की सुरक्षा और गोपनीयता की नीतियों पर भी नई बहस छेड़ दी है। रक्षा मंत्रालय (MoD) अब सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए किताब लिखने की अनुमति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कड़ा बनाने के लिए नई गाइडलाइंस तैयार कर रहा है।

1. क्या है पूरा विवाद? (The Controversy)

** Galwan और Agnipath पर खुलासे:** रिपोर्टों के अनुसार, जनरल नरवणे ने अपनी किताब में 2020 के गलवान संघर्ष और अग्निपथ योजना की शुरुआत से जुड़े कई अनसुने और संवेदनशील विवरण साझा किए हैं।

संसद में हंगामा: बजट सत्र 2026 के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद में इस अप्रकाशित किताब की प्रति लहराते हुए सरकार को घेरा, जिसके बाद सत्ता पक्ष ने इसे 'असत्यापित' और 'सुरक्षा के लिए खतरा' बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई।

FIR और लीक: दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक FIR भी दर्ज की है क्योंकि किताब की कथित 'प्री-प्रिंट' प्रतियां और PDF सोशल मीडिया पर अवैध रूप से प्रसारित हो रही थीं।

2. सरकार के नए प्रस्तावित नियम (Proposed Stricter Rules)

वर्तमान में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के लिए कोई एकल एकीकृत कानून नहीं है, जिससे स्पष्टता की कमी रहती है। सरकार अब निम्नलिखित बदलावों पर विचार कर रही है:

अनिवार्य क्लीयरेंस (Mandatory Vetting): सेवानिवृत्त अधिकारियों को अपनी पांडुलिपि (Manuscript) प्रकाशन से पहले रक्षा मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय समिति को भेजनी होगी।

पेंशन पर रोक: यदि कोई अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा या Official Secrets Act (OSA) का उल्लंघन कर संवेदनशील जानकारी साझा करता है, तो सरकार उसकी पेंशन रोकने या वापस लेने का अधिकार रखेगी (2021 के पेंशन नियमों के अनुसार)।

लॉयल्टी क्लॉज: अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद एक शपथ पत्र देना पड़ सकता है कि वे सेवा के दौरान मिली गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक नहीं करेंगे।

3. वर्तमान कानून क्या कहता है?

श्रेणीलागू नियम/कानूनमुख्य प्रावधान
सेवारत सैन्य अधिकारीआर्मी रूल्स, 1954 (धारा 21)बिना केंद्र सरकार की अनुमति के कोई किताब या लेख नहीं लिख सकते।
सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारीOfficial Secrets Act (OSA), 1923यह कानून ताउम्र लागू रहता है; संवेदनशील जानकारी लीक करने पर जेल हो सकती है।
सिविल सर्वेंट्स (IAS/IPS)पेंशन नियम (संशोधित 2021)सुरक्षा या खुफिया एजेंसी से जुड़े अधिकारी बिना क्लीयरेंस के कुछ नहीं लिख सकते।

4. प्रकाशक और जनरल नरवणे का पक्ष

प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया और जनरल नरवणे ने स्पष्ट किया है कि:

किताब अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है।

पांडुलिपि रक्षा मंत्रालय के पास समीक्षा (Vetting) के लिए लंबित है।

इंटरनेट पर प्रसारित हो रही प्रतियां कॉपीराइट का उल्लंघन और अवैध हैं।