कंडोम महंगे और बच्चे ज्यादा? चीन की ये मुसीबत और भारत के लिए खुशखबरी

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News India Live, Digital Desk : आमतौर पर हम सुनते हैं कि सरकारें आबादी घटाने के लिए 'कंडोम' और नसबंदी जैसी चीजों को बढ़ावा देती हैं। हमारे देश में तो "हम दो, हमारे दो" के नारे लगते हैं। लेकिन, हमारा पड़ोसी चीन इस समय उल्टी गंगा बहाने की तैयारी में है। वहां हालात ऐसे हो गए हैं कि सरकार अब कह रही है "भैया, प्लीज बच्चे पैदा करो!"

हालिया ख़बरों ने तो सबका दिमाग चकरा दिया है। चर्चा है कि चीन अपनी घटती आबादी को बढ़ाने के लिए अब कंडोम को महंगा करने या उसकी उपलब्धता कम करने जैसी अजीबोगरीब तरकीबों पर भी विचार कर सकता है।

आखिर चीन इतना डरा हुआ क्यों है?

असल में, चीन एक बड़े संकट में फंस गया है। लगातार तीसरे साल उसकी आबादी घटी है। जो देश कभी दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला था, आज वहां के पार्क और स्कूल सूने होते जा रहे हैं।

इसके पीछे वजह है उनकी पुरानी 'वन चाइल्ड पॉलिसी' (एक बच्चे की नीति)। सालों तक उन्होंने लोगों को एक ही बच्चे पर मजबूर किया, और अब जब वे चाहते हैं कि लोग ज्यादा बच्चे पैदा करें, तो वहां के युवा तैयार नहीं हैं। महंगाई, करियर और आजादी के चक्कर में चीनी कपल्स बच्चे पैदा करना ही नहीं चाहते।

कंडोम वाला क्या माजरा है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनसंख्या बढ़ाने के लिए चीन में कंडोम इंडस्ट्री पर कुछ सख्ती या बदलाव देखे जा रहे हैं। विचार यह हो सकता है कि अगर गर्भनिरोधक (Contraceptives) महंगे या मुश्किल से मिलेंगे, तो शायद बर्थ रेट बढ़ जाए।

सुनने में यह प्लान थोड़ा मजाकिया और 'डेस्प्रेट' (हताशा भरा) लगता है, लेकिन यह दिखाता है कि चीन की सरकार अपनी गिरती इकॉनमी और बूढ़ी होती जनता को लेकर कितनी परेशान है।

भारत के लिए इसमें क्या मौका है?

अब आते हैं सबसे काम की बात पर— इसमें हमारा और आपका क्या फायदा?

देखिये, किसी भी देश की असली ताकत उसके काम करने वाले लोग (Workforce) होते हैं। चीन 'बूढ़ा' हो रहा है, वहां फैक्ट्रियों में काम करने के लिए जवान लोग कम पड़ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारत एक जवान देश है।

दुनिया की बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ, जो अब तक चीन में सामान बनाती थीं, उन्हें अब वहां मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत का डर सता रहा है। ऐसे में उनकी नजर भारत पर है। यह भारत के लिए एक 'गोल्डन चांस' है कि हम मैन्युफैक्चरिंग (निर्माण) का नया बादशाह बनें।

तो कुल मिलाकर बात यह है कि चीन अपनी पुरानी गलतियों का फल भुगत रहा है, और भारत के लिए किस्मत के दरवाजे खुल रहे हैं। समय वाकई बहुत बलवान है!