एग्जिट पोल में कांटे की टक्कर, पर BJP दफ्तर में 501 किलो लड्डुओं का ऑर्डर ,नतीजों से पहले ही जश्न की तैयारी?
News India Live, Digital Desk: बिहार में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने में अभी कुछ घंटे बाकी हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त है. एक तरफ जहां ज़्यादातर एग्जिट पोल NDA और महागठबंधन के बीच बेहद करीबी और कांटे की टक्कर दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पटना में BJP ने अपनी जीत के जश्न की तैयारियां शुरू कर दी हैं.
यह कोई साधारण तैयारी नहीं है, बल्कि एक शाही जश्न की तैयारी लगती है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बिहार बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व ने नतीजों से पहले ही पटना के एक बड़े मिठाई दुकानदार को 501 किलो शुद्ध देसी घी के बेसन के लड्डुओं का ऑर्डर दे दिया है.
आत्मविश्वास, अति-आत्मविश्वास या फिर 'माइंड गेम'?
जब मुकाबला इतना कड़ा हो, तो नतीजों से पहले ही इतने बड़े जश्न की तैयारी करना कई सवाल खड़े करता है. राजनीतिक गलियारों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं:
- पार्टी के आंतरिक सर्वे पर भरोसा: हो सकता है कि BJP का अपना आंतरिक सर्वे और जमीनी कार्यकर्ताओं से मिला फीडबैक उसे एग्जिट पोल के आंकड़ों से कहीं ज़्यादा सीटें दिला रहा हो, जिसके आधार पर पार्टी अपनी जीत को लेकर इतनी निश्चिंत है.
- मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति: राजनीति में माहौल बनाना भी एक बड़ी कला है. नतीजों से पहले ही जश्न की तैयारी की खबर फैलाकर, BJP अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरना चाहती है और विपक्षी खेमे में यह संदेश भेजना चाहती है कि वे हार मान चुके हैं और हम जीत रहे हैं. इसे 'माइंड गेम' का एक हिस्सा भी माना जा रहा है.
क्या कहते हैं एग्जिट पोल?
आपको बता दें कि बिहार विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 122 सीटों का जादुई आंकड़ा चाहिए. ज़्यादातर एग्जिट पोल NDA को 110-120 सीटों के आसपास दिखा रहे हैं, जो बहुमत से बस कुछ ही कदम दूर है. कुछ सर्वे में NDA को बहुमत मिलता हुआ भी दिखाया गया है. शायद यही वो आंकड़े हैं जो BJP को यह आत्मविश्वास दे रहे हैं कि छोटी-मोटी पार्टियों या निर्दलीय विधायकों के समर्थन से वे आराम से सरकार बना लेगी.
खैर, सच्चाई क्या है, यह तो EVM खुलने के बाद ही पता चलेगा. लेकिन एक बात तो तय है कि BJP ने अपनी तरफ से 'कमल' खिलने और 'विजय' का स्वाद चखने की पूरी तैयारी कर ली ہے. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ये 501 किलो लड्डू जीत की मिठास बनकर बंटते हैं या उम्मीदों का जायका बनकर रह जाते हैं.