चीन का आसमानी दैत्य दुनिया के सामने ,क्या अमेरिका के F-35 की बादशाहत अब खत्म हो गई?

Post

News India Live, Digital Desk : एक ऐसी खबर जिसने दुनिया भर की सेनाओं, खासकर अमेरिका की नींद उड़ा दी है। चीन ने गुपचुप तरीके से अपने सबसे बड़े और सबसे खतरनाक हथियार, छठी पीढ़ी के फाइटर जेट, को दुनिया के सामने लाने की तैयारी कर ली है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे J-36 'स्काई मॉन्स्टर' (Sky Monster) का नाम दिया जा रहा है, और कहा जा रहा है कि यह जेट टेक्नोलॉजी में इतना आगे है कि इसके सामने अमेरिका का सबसे आधुनिक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट भी पुराना लगने लगा है।

यह खबर सिर्फ एक नए हवाई जहाज के आने की नहीं है, बल्कि यह इस बात का ऐलान है कि आसमान पर अब किसी एक देश की बादशाहत नहीं चलेगी।

क्या है इस J-36 में जो दुनिया डर गई?

कल्पना कीजिए एक ऐसे लड़ाकू विमान की जो लगभग अदृश्य हो, यानी किसी भी रडार की पकड़ में न आए। जो इंसान के सोचने की गति से भी तेज फैसले ले सके और जिसे उड़ाने के लिए शायद पायलट की जरूरत भी न पड़े। J-36 कुछ ऐसा ही है।

  • असली स्टील्थ (True Stealth): अमेरिका का F-35 और F-22 अपनी स्टील्थ टेक्नोलॉजी, यानी रडार से छिपने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। लेकिन कहा जा रहा है कि J-36 इस तकनीक में एक कदम और आगे है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): यह सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि एक उड़ने वाला सुपरकंप्यूटर है। इसका AI पायलट को लड़ाई के दौरान ऐसे सुझाव दे सकता है जो एक इंसान सोच भी नहीं सकता। यह एक साथ दर्जनों दुश्मन के ठिकानों पर नजर रख सकता है और तय कर सकता है कि कब और किसे निशाना बनाना है।
  • ड्रोन का सरदार: यह जेट खुद लड़ने के साथ-साथ अपने साथ उड़ने वाले छोटे-छोटे लड़ाकू ड्रोन्स के झुंड को भी कंट्रोल कर सकता है। यानी, पायलट जेट के अंदर बैठकर ही एक पूरी सेना को कमांड दे सकता है।
  • हाइपरसोनिक रफ्तार (Hypersonic Speed): कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि इसकी रफ्तार आवाज की गति से कई गुना तेज हो सकती है, जिससे इसे रोकना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।

क्या F-35 का जमाना खत्म हो गया?

F-35 को अब तक दुनिया का सबसे एडवांस फाइटर जेट माना जाता रहा है, और अमेरिका ने इस पर खरबों डॉलर खर्च किए हैं। लेकिन J-36 के आने की खबर ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका टेक्नोलॉजी की इस दौड़ में पिछड़ गया है? अगर चीन वाकई में इतनी उन्नत तकनीक वाला विमान बनाने में कामयाब हो गया है, तो यह एशिया और पूरी दुनिया में शक्ति के संतुलन को पूरी तरह से बदल सकता है।

यह सिर्फ एक हवाई जहाज की लड़ाई नहीं है, यह दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों के बीच टेक्नोलॉजी, दबदबे और भविष्य पर नियंत्रण की लड़ाई है। चीन का 'आसमानी दैत्य' सिर्फ लोहे का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि दुनिया को एक सीधा संदेश है - कि अब आसमान का राजा कोई एक नहीं होगा।