चीन का चमत्कारी डिफेंस सिस्टम फेल? भारत की मिसाइल ने कैसे पाकिस्तान की नींद उड़ाई

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News India Live, Digital Desk: आपको मार्च 2022 का वो वाकया याद है, जब भारत की तरफ से एक मिसाइल गलती से फायर हो गई थी और सीधा पाकिस्तान के इलाके में जाकर गिरी? उस वक्त इसे लेकर बहुत राजनीतिक और कूटनीतिक हल्ला हुआ था। लेकिन अब एक सीक्रेट रिपोर्ट (Secret Report on BrahMos) सामने आई है, जिसने एक ऐसी सच्चाई से पर्दा उठाया है जिसे सुनकर हर भारतीय हैरान भी होगा और थोड़ा मुस्कुराएगा भी।

यह खबर सिर्फ भारत और पाकिस्तान के रिश्तों के बारे में नहीं है, बल्कि यह चीन के हथियारों की उस 'नकली मजबूती' की पोल खोलती है जिसे वो दुनिया भर में बेचता फिरता है।

हुआ क्या था असल में?
दरअसल, जब भारत की वह सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (जिसे ब्रह्मोस माना जाता है) गलती से लॉन्च हुई, तो वह बिजली की रफ़्तार से पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हुई। मिया चन्नू (Mian Channu) इलाके में गिरने से पहले उसने पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में एक लंबा सफर तय किया। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर पाकिस्तान की एयर फोर्स और उनका एयर डिफेंस सिस्टम कर क्या रहा था?

पाकिस्तान का घमंड और चीन का 'HQ-9' सिस्टम
पाकिस्तान अपनी हवाई सुरक्षा (Air Defense) को लेकर हमेशा बड़े दावे करता रहा है। इसकी वजह यह है कि उसने अपने 'सदाबहार दोस्त' चीन से HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम (China's HQ-9 Air Defense System) खरीदा हुआ है। चीन दावा करता है कि उनका HQ-9 दुनिया के बेहतरीन रडार और मिसाइल इंटरसेप्टर में से एक है, जो किसी भी हमले को हवा में ही खत्म कर सकता है।

लेकिन सीक्रेट रिपोर्ट (Defence Analysis Report) बताती है कि हकीकत कुछ और ही निकली।

जब भारतीय मिसाइल पाकिस्तान में घुसी, तो चीन का यह 'महंगा और आधुनिक' रडार सिस्टम उसे पकड़ने में पूरी तरह नाकाम रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय मिसाइल पाकिस्तान के डिफेंस सिस्टम को "मक्खन की तरह चीरती हुई (Tore through like butter)" निकल गई। उस वक़्त तैनात चीनी रडार न तो मिसाइल को समय पर डिटेक्ट कर पाए और न ही उसे रोकने के लिए कोई जवाबी कार्रवाई (Interception) कर पाए।

चीन के हथियारों पर सवालिया निशान
यह घटना पाकिस्तान के लिए तो शर्मिंदगी का सबब बनी ही है, लेकिन उससे भी बड़ा झटका चीन को लगा है। चीन दुनिया भर के देशों को यह कहकर अपने हथियार बेचता है कि उसकी टेक्नोलॉजी अमेरिका और रूस के टक्कर की है। लेकिन भारत की एक ही मिसाइल ने यह साबित कर दिया कि चाइनीज मिलिट्री टेक्नोलॉजी (Chinese Military Tech Failure) शायद उतनी दमदार नहीं है जितना प्रचार किया जाता है।

सोचिए, अगर युद्ध के हालात होते और यह मिसाइल 'आर्म्ड' (हथियारों से लैस) होती, तो पाकिस्तान के रणनीतिक ठिकानों का क्या हाल होता? उनका डिफेंस सिस्टम तो सोता ही रह गया था।

भारत की टेक्नोलॉजी का लोहा
जहां पाकिस्तान, चीनी सिस्टम (HQ-9) के भरोसे बैठा था, वहीं भारत ने अपनी मिसाइल टेक्नोलॉजी में गजब की सटीकता और स्पीड हासिल की है। दुनिया मानती है कि भारत की ब्रह्मोस मिसाइल (Indian BrahMos Missile capability) को पकड़ना किसी भी रडार के लिए आसान नहीं है। और इस घटना ने अनजाने में ही सही, इस बात पर मुहर लगा दी है।

अब विशेषज्ञ मान रहे हैं कि पाकिस्तान के रणनीतिकारों (Strategic Planners) के होश फाख्ता हैं। उन्हें समझ आ गया है कि जिस 'कवच' को वो अभेद्य मान रहे थे, उसमें बड़े छेद हैं।

संक्षेप में कहें तो, यह घटना भारत की ताकत का प्रदर्शन कम और चीनी हथियारों की पोल (Exposing Chinese Weapons Quality) खोलने वाली घटना ज्यादा बन गई है। पाकिस्तान के हाथ में जो चाइनीज रिमोट था, उसने ऐन मौके पर काम करना बंद कर दिया।