चीन को भारत की तरक्की से दिक्कत! 'मेक इन इंडिया' के खिलाफ WTO पहुंचा, कहा- भेदभाव हो रहा
China WTO complaint against India PLI : भारत जब भी अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कोई बड़ा कदम उठाता है, तो पड़ोसी देश चीन की बेचैनी बढ़ जाती है। इस बार कहानी में एक नया मोड़ आया है। चीन ने भारत की कुछ आर्थिक नीतियों के खिलाफ सीधे विश्व व्यापार संगठन (WTO) का दरवाजा खटखटा दिया है और शिकायत की है कि भारत भेदभाव कर रहा है।
चीन का कहना है कि भारत की ये नीतियां अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियमों के खिलाफ हैं।
चीन को आखिर किस बात से है परेशानी?
चीन ने WTO में भारत के साथ बातचीत की मांग की है। उसकी मुख्य नाराजगी भारत की उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI)योजना को लेकर है, जिसका मकसद देश में ही चीजों का उत्पादन बढ़ाना है। चीन का आरोप है कि भारत की ये योजनाएं अपने देश में बने सामान को ज्यादा तवज्जो देती हैं, जिससे चीन में बने सामानों के साथ भेदभाव हो रहा है और उसे व्यापार में नुकसान हो रहा है।
चीन ने खास तौर पर इन तीन योजनाओं पर उंगली उठाई है:
- बैटरी बनाने की योजना:एडवांस केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए शुरू किया गया नेशनल प्रोग्राम।
- गाड़ियां बनाने की योजना:मोटर वाहन और उनके पुर्जों के लिए लाई गई PLI स्कीम।
- इलेक्ट्रिक कार बनाने की योजना:देश में इलेक्ट्रिक कारों के उत्पादन को बढ़ावा देने वाली स्कीम।
चीन का कहना है कि ये सभी योजनाएं WTO के नियमों का उल्लंघन करती हैं और इससे चीन को मिलने वाले व्यापारिक फायदे कम हो रहे हैं।
अब आगे क्या होगा?
जब WTO में कोई एक सदस्य देश दूसरे देश के खिलाफ शिकायत करता है, तो प्रक्रिया की शुरुआत बातचीत से होती है।
- पहला कदम:अब भारत और चीन इस मुद्दे पर बैठकर बातचीत करेंगे और अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे।
- अगर बात नहीं बनी:यदि बातचीत से कोई हल नहीं निकलता है, तो चीन WTO से इस मामले पर फैसला देने या एक जांच कमेटी बनाने के लिए कह सकता है।
व्यापार के आंकड़ों में छिपी है असली वजह
चीन की यह बेचैनी बेवजह नहीं है। भारत और चीन के बीच व्यापार का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। आंकड़े बताते हैं कि:
- चीन को हमारा निर्यात (जो हम बेचते हैं) 14.5% तक घट गया है।
- वहीं, चीन से हमारा आयात (जो हम खरीदते हैं) 11.52% बढ़ गया है।
इसका नतीजा यह है कि 2024-25 में चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा बढ़कर 99.2 अरब डॉलर के भारी-भरकम स्तर पर पहुंच गया है। यानी हम चीन से खरीद तो बहुत ज्यादा रहे हैं, लेकिन उसे बेच बहुत कम पा रहे हैं।
भारत की PLI जैसी योजनाएं इसी घाटे को कम करने और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हैं, जो जाहिर तौर पर चीन को पसंद नहीं आ रही हैं। अब देखना होगा कि WTO में होने वाली इस बातचीत का दोनों देशों के रिश्तों और 'मेक इन इंडिया' के भविष्य पर क्या असर पड़ता है।