Operation Trashi-I: किश्तवाड़ में जैश का सैफुल्लाह ग्रुप खत्म 20 लाख का इनामी कमांडर समेत 3 आतंकी ढेर
News India Live, Digital Desk : भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर (White Knight Corps), जम्मू-कश्मीर पुलिस (SOG) और CRPF ने एक संयुक्त ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद के उस समूह का सफाया कर दिया है, जो पिछले कई वर्षों से चिनाब घाटी में सक्रिय था। मारे गए आतंकियों में जैश का टॉप कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल है।
एनकाउंटर की मुख्य बातें (Key Highlights):
सैफुल्लाह का अंत: मारा गया मुख्य आतंकी सैफुल्लाह पिछले 5 साल से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय था। उस पर 20 लाख रुपये का इनाम था। वह जुलाई 2024 में सेना पर हुए हमले सहित कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड था।
मारे गए आतंकियों की पहचान:
सैफुल्लाह: (टॉप कमांडर, पाकिस्तानी मूल)
फरमान अली: (पाकिस्तानी आतंकी)
बाशा उर्फ हुरैरा: (पाकिस्तानी आतंकी) इन तीनों पर पुलिस ने 5-5 लाख का अतिरिक्त इनाम भी घोषित किया था।
मिट्टी के घर (Dhok) में छिपे थे आतंकी: सुरक्षाबलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि आतंकी चतरू इलाके के पासरकूट (Passerkut) की पहाड़ियों पर एक मिट्टी के घर (ढोक) में छिपे हैं। घेराबंदी के दौरान आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की, जिसके बाद हुई भीषण मुठभेड़ में घर में आग लग गई और आतंकियों के शव बुरी तरह झुलस गए।
हथियारों की बरामदगी: मौके से 3 एके-47 राइफलें, भारी मात्रा में गोला-बारूद और 'वॉर-लाइक स्टोर्स' बरामद किए गए हैं।
[Image showing Indian Army Special Forces during Operation Trashi-I in Kishtwar snow peaks]
ऑपरेशन त्रिशूल (Operation Trashi-I) का बैकग्राउंड
शुरुआत: यह ऑपरेशन इसी साल 18 जनवरी को शुरू हुआ था, जब चतरू के जंगलों में आतंकियों से पहली मुठभेड़ हुई थी।
बलिदान: 19 जनवरी को इस ऑपरेशन के दौरान 2 पैरा (स्पेशल फोर्सेस) के हवलदार गजेंद्र सिंह शहीद हो गए थे और सात अन्य जवान घायल हुए थे।
सफलता: सेना ने एक महीने से अधिक समय तक इस दुर्गम और बर्फीले इलाके में पीछा जारी रखा और अंततः पूरे ग्रुप को खत्म करने में सफलता पाई।
सेना का संदेश
व्हाइट नाइट कोर ने सोशल मीडिया (X) पर स्पष्ट संदेश दिया:
“शिकार जारी है - जो शांति भंग करना चाहते हैं, उन्हें कोई पनाह नहीं मिलेगी।”