China Nuclear Secret : पहाड़ काटकर चीन बना रहा परमाणु ठिकाना सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला ड्रैगन की खतरनाक साजिश का राज

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News India Live, Digital Desk : दुनिया की नजरों से बचकर चीन एक ऐसी 'पाताल नगरी' तैयार कर रहा है जो भविष्य में वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों (Satellite Imagery) ने खुलासा किया है कि ड्रैगन ने अपने परमाणु हथियारों को छिपाने और तैनात करने के लिए ऊंचे पहाड़ों के भीतर विशाल सैन्य बेस तैयार किए हैं। इन तस्वीरों ने न केवल अमेरिका बल्कि भारत सहित पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।

सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा?

हाल ही में सामने आई हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों से पता चला है कि चीन ने अपने पश्चिमी और उत्तर-मध्य क्षेत्रों के दुर्गम पहाड़ों में बड़े पैमाने पर खुदाई की है। विशेषज्ञों का दावा है कि ये केवल साधारण सुरंगें नहीं, बल्कि अत्याधुनिक न्यूक्लियर मिसाइल साइलो (Nuclear Missile Silos) हैं।

विशाल प्रवेश द्वार: पहाड़ों के बीच ऐसे द्वार बनाए गए हैं जहाँ से भारी मिसाइल ट्रक और लॉन्चर आसानी से अंदर-बाहर जा सकें।

मजबूत कंक्रीट कवर: परमाणु हमले को झेलने के लिए इन ठिकानों पर कंक्रीट की कई परतें चढ़ाई गई हैं।

छिपा हुआ नेटवर्क: पहाड़ों के नीचे मीलों लंबी सुरंगों का जाल फैलाया गया है, ताकि दुश्मन को पता न चले कि हथियार असल में कहाँ रखे हैं।

ड्रैगन का 'नो फर्स्ट यूज' ड्रामा और हकीकत

चीन हमेशा से कहता रहा है कि उसकी नीति 'नो फर्स्ट यूज' (पहले परमाणु हमला न करना) की है। लेकिन जिस गति से वह भूमिगत परमाणु अड्डों का विस्तार कर रहा है, उससे विशेषज्ञों को संदेह है कि चीन अपनी रणनीति बदल रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग 'पेंटागन' की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन 2030 तक अपने परमाणु हथियारों की संख्या 1000 के पार ले जाने की तैयारी में है।

दुनिया के लिए क्यों है यह खतरे की घंटी?

पहाड़ों के भीतर बने इन अड्डों को नष्ट करना किसी भी देश के लिए लगभग नामुमकिन है।

ट्रैकिंग में मुश्किल: सैटेलाइट के जरिए यह पता लगाना असंभव हो जाता है कि कौन सी मिसाइल सक्रिय है और कौन सी नहीं।

जवाबी हमला: यदि चीन पर हमला होता है, तो ये पहाड़ उसके परमाणु हथियारों को सुरक्षित रखेंगे, जिससे वह भीषण जवाबी हमला (Second Strike) करने में सक्षम होगा।

क्षेत्रीय तनाव: भारत और ताइवान के साथ चल रहे तनाव के बीच चीन की यह सैन्य तैयारी सीधे तौर पर डराने वाली रणनीति (Deterrence) का हिस्सा है