US-Iran Crisis : यह केवल चेतावनी नहीं, युद्ध की तैयारी है पेंटागन के पूर्व अधिकारी का दावा ईरान पर बड़ा हमला कर सकता है अमेरिका
News India Live, Digital Desk: US-Iran Crisis : मध्य पूर्व (Middle East) में बारूद की गंध तेज होने लगी है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब उस मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ कूटनीति की जगह युद्ध की धमकियाँ ले रही हैं। पेंटागन (Pentagon) के पूर्व अधिकारियों और रक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों (Military Fleets) की भारी तैनाती केवल एक 'चेतावनी' नहीं है, बल्कि यह ईरान के खिलाफ एक "सस्टेंड मिलिट्री कैंपेन" (Sustained Military Campaign) की ओर इशारा कर रही है।
पेंटागन की गोपनीय तैयारी: हफ्तों तक चल सकता है हमला?
मीडिया रिपोर्ट्स और रक्षा सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेना केवल एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' की योजना नहीं बना रही है। दावा किया जा रहा है कि यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आदेश देते हैं, तो अमेरिकी सेना हफ्तों तक चलने वाले भीषण हवाई और मिसाइल हमले के लिए तैयार है।
निशाने पर क्या है? इस बार केवल परमाणु ठिकाने ही नहीं, बल्कि ईरान के सरकारी दफ्तर, सुरक्षा प्रतिष्ठान और बुनियादी ढाँचे भी अमेरिकी मिसाइलों की जद में हो सकते हैं।
मिसाइल डिफेंस एक्टिव: कतर और जॉर्डन जैसे देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर 'पैट्रियट मिसाइल सिस्टम' को मोबाइल लॉन्चरों पर तैनात कर दिया गया है ताकि ईरानी जवाबी हमले का तुरंत जवाब दिया जा सके।
प्रेसिडेंट ट्रंप का 'मैसिव आर्माडा' (Massive Armada)
राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में खाड़ी की ओर बढ़ रहे युद्धपोतों के बेड़े को 'आर्माडा' (विशाल नौसैनिक बेड़ा) करार दिया है। दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड (USS Gerald R. Ford) पहले से तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ जुड़ने वाला है। हजारों अतिरिक्त सैनिक, लड़ाकू विमान और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर इस समय ईरान के तट के बेहद करीब हैं।
ईरान की जवाबी चेतावनी: 'उंगलियां ट्रिगर पर हैं'
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने भी साफ कर दिया है कि वे चुप नहीं बैठेंगे। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी धरती पर एक भी मिसाइल गिरी, तो पूरे क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने और उनके सहयोगी देश ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों के निशाने पर होंगे। ईरान ने अपनी मिसाइल यूनिट्स को 'हाई अलर्ट' पर रखा है और किसी भी हमले को 'पूर्ण युद्ध' (Total War) की शुरुआत माना जाएगा।
दुनिया पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव शुरू होता है, तो इसके वैश्विक परिणाम 'अकल्पनीय' होंगे:
कच्चे तेल की कीमतें: ब्रेंट क्रूड की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।
क्षेत्रीय अस्थिरता: लेबनान, इराक और यमन जैसे देश भी इस युद्ध की चपेट में आ सकते हैं।
नेगोशिएशन पर ब्रेक: फिलहाल ओमान के जरिए चल रही बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद हो सकते हैं।