China-Nepal Border : चीन की घेराबंदी वाली चाल, शांत पहाड़ियों में तोपों और मिसाइलों की आहट क्यों?

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News India Live, Digital Desk : भारत और चीन के रिश्तों में तल्खी किसी से छिपी नहीं है, लेकिन अब चीन जो कर रहा है, वह थोड़ा चौंकाने वाला है। आम तौर पर हम लद्दाख या अरुणाचल प्रदेश बॉर्डर पर तनाव की खबरें सुनते हैं, लेकिन इस बार चीन ने अपनी हलचल 'नेपाल बॉर्डर' के पास बढ़ा दी है।

आखिर नेपाल सीमा पर क्या कर रहा है चीन?

रिपोर्ट्स और जानकारों की मानें तो चीन, नेपाल के उत्तरी इलाके यानी तिब्बत वाले हिस्से में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। वहां सड़कें चौड़ी की जा रही हैं, हेलीपैड बनाए जा रहे हैं और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों की संख्या में भी इजाफा देखा गया है।

सीधी भाषा में समझें तो, चीन नेपाल को एक ढाल की तरह इस्तेमाल करते हुए भारत के उन इलाकों पर दबाव बनाना चाहता है जो रणनीतिक रूप से हमारे लिए बहुत अहम हैं, जैसे कि उत्तराखंड और यूपी का बॉर्डर एरिया और सिलीगुड़ी कॉरिडोर (Siliguri Corridor)।

क्या अरुणाचल है असली टारगेट?

रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन की यह "डायवर्जन टैक्टिक्स" (ध्यान भटकाने की रणनीति) हो सकती है। चीन अच्छी तरह जानता है कि भारतीय सेना लद्दाख और अरुणाचल में पूरी तरह मुस्तैद है। ऐसे में वह नेपाल बॉर्डर पर हलचल बढ़ाकर भारत का ध्यान वहां खींचना चाहता है, ताकि मौके का फायदा उठाकर वह पूर्वी सेक्टर यानी अरुणाचल प्रदेश में कोई नापाक हरकत कर सके।

बीजिंग हमेशा से अरुणाचल प्रदेश पर अपनी बेतुकी दावेदारी जताता रहा है। अब जब वह नेपाल सीमा पर अपनी ताकत दिखा रहा है, तो सवाल उठता है कि क्या यह भारत को 'चिकन नेक' (Chicken’s Neck) के पास घेरने की कोशिश है?

भारत कितना तैयार है?

राहत की बात यह है कि भारतीय खुफिया एजेंसियां और सेना (Indian Army) चीन की हर हरकत पर पैनी नजर रखे हुए हैं। चाहे वो सिक्किम हो, उत्तराखंड हो या अरुणाचल, भारत ने भी अपनी सीमाओं पर 'मिरर डिप्लॉयमेंट' (यानी जितनी फौज सामने, उतनी ही अपनी तरफ) कर रखा है।

लेकिन, नेपाल की बदलती राजनीतिक हवा और चीन का बढ़ता दखल भारत के लिए सिरदर्द जरूर बन सकता है। चीन का मकसद साफ है बिना युद्ध लड़े मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना। अब देखना यह होगा कि भारत कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर इस नई चुनौती का जवाब कैसे देता है।