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April 14 2026 01:14 am

ईरान को हथियार सप्लाई कर रहा चीन? ड्रैगन ने पश्चिमी देशों के आरोपों को बताया बेबुनियाद, दी चेतावनी

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News India Live, Digital Desk : मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच दुनिया की महाशक्तियों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। हाल ही में पश्चिमी मीडिया और कुछ देशों द्वारा दावा किया गया था कि चीन (China) गुप्त रूप से ईरान (Iran) को हथियारों और सैन्य उपकरणों की सप्लाई कर रहा है। अब इन खबरों पर चीन ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सख्त रुख अख्तियार किया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने इन तमाम रिपोर्टों को 'पूरी तरह निराधार' और 'दुर्भावनापूर्ण आरोप' करार दिया है।

चीन ने आरोपों को बताया 'फर्जी प्रोपेगेंडा'

चीनी सरकार के प्रवक्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि चीन हमेशा से विश्व शांति का पक्षधर रहा है और वह किसी भी युद्धग्रस्त क्षेत्र में आग भड़काने का काम नहीं करता है। बीजिंग का दावा है कि पश्चिमी देश अपनी विफलताओं को छिपाने और चीन की छवि खराब करने के लिए इस तरह के मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। चीन ने साफ कहा कि ईरान के साथ उसके संबंध द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में हैं, जिसमें हथियारों की अवैध सप्लाई जैसा कोई मुद्दा शामिल नहीं है।

मध्य पूर्व में तनाव के बीच चीन की भूमिका

ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध के बीच चीन खुद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का मानना है कि चीन और रूस जैसे देश पर्दे के पीछे से ईरान की सैन्य ताकत बढ़ा रहे हैं। चीन ने पलटवार करते हुए कहा कि जो देश खुद क्षेत्र में भारी मात्रा में हथियार भेज रहे हैं, उन्हें दूसरों पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

बीजिंग की चेतावनी: बंद हो निराधार बयानबाजी

चीन ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे इस तरह की 'बेबुनियाद' खबरों पर भरोसा न करें। ड्रैगन ने चेतावनी दी है कि चीन के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कोशिश का करारा जवाब दिया जाएगा। बीजिंग का कहना है कि वह मध्य पूर्व में तनाव कम करने के लिए राजनयिक प्रयासों का समर्थन करता है, न कि सैन्य टकराव का।

क्या हैं पश्चिमी देशों के दावे?

बता दें कि हालिया इंटेलिजेंस रिपोर्टों में संकेत दिया गया था कि ईरान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल तकनीक में चीन निर्मित कंपोनेंट्स का इस्तेमाल हो रहा है। इसी को आधार बनाकर पश्चिमी देशों ने चीन की घेराबंदी शुरू की थी। अब चीन के इस कड़े खंडन के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया मोड़ आने की संभावना है।