सीएम विष्णुदेव साय ने फहराया तिरंगा, कहा- 'नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ में अब बह रही शांति और विकास की बयार

सीएम विष्णुदेव साय ने फहराया तिरंगा, कहा- 'नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ में अब बह रही शांति और विकास की बयार

देशभर में आज स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास, देशभक्ति और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक और गौरवशाली अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य राजकीय समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया और भव्य परेड की सलामी ली। स्वतंत्रता दिवस के इस पावन पर्व पर राज्य की जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक बयान दिया। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि कभी बस्तर और सुदूर अंचलों में आतंक का पर्याय बन चुका नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और छत्तीसगढ़ बहुत जल्द पूरी तरह से नक्सलमुक्त होने की ओर बढ़ रहा है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब राज्य के इन संवेदनशील इलाकों में खून-खराबे की जगह शांति, समृद्धि और चहुंमुखी विकास की ठंडी बयार बह रही है। आइए जानते हैं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के इस प्रेरणादायक संबोधन और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा की गई महत्वपूर्ण घोषणाओं से जुड़ी सभी बड़ी बातें।

बस्तर और माड़ के इलाकों में विकास की नई सुबह

अपने ओजस्वी संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विशेष रूप से बस्तर और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया जो दशकों तक वामपंथी उग्रवाद और हिंसा की आग में झुलसते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, केंद्रीय सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय प्रशासन के तालमेल के कारण आज नक्सलियों का दायरा सिमटता जा रहा है। जिन इलाकों में कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी और स्कूल-अस्पताल खंडहर में तब्दील कर दिए गए थे, आज वहां सुरक्षा कैंपों की स्थापना के बाद विकास की किरणें पहुंच रही हैं। सरकार ने इन दूरदराज के गांवों में पक्की सड़कें, बिजली, शुद्ध पेयजल, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचानी शुरू कर दी हैं। बस्तर के आदिवासी भाई-बहन अब डर के साये से बाहर निकलकर मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और अपनी संस्कृति के साथ खुलकर जीवन जी रहे हैं।

सुरक्षाबलों के शौर्य और समर्पण को मिला सर्वोच्च सम्मान

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे निर्णायक अभियानों की सफलता का पूरा श्रेय मुख्यमंत्री ने राज्य पुलिस, डीआरजी (DRG), बस्तर फाइटर्स, सीआरपीएफ (CRPF) और कोबरा बटालियन के वीर जवानों को दिया। उन्होंने कहा कि हमारे सुरक्षाबलों के जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना अदम्य साहस और बहादुरी का परिचय दिया है, जिसके परिणामस्वरूप उग्रवादियों को करारी शिकस्त मिली है। सरकार ने शहीद जवानों के परिवारों के कल्याण और उनके बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष योजनाएं चलाई हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति बेहद उदार और आकर्षक है, जिससे प्रभावित होकर कई भटके हुए युवा वापस लौट रहे हैं।

युवाओं के रोजगार, शिक्षा और किसानों के कल्याण पर बड़ा फोकस

केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कई बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए औद्योगिक नीतियों में बदलाव किए गए हैं और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। किसानों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए धान खरीदी, कृषि उन्नति योजनाओं और सिंचाई के साधनों को और अधिक पारदर्शी व मजबूत बनाया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधारने के लिए एकलव्य विद्यालयों और बस्तर संभाग में विशेष शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है ताकि गरीब से गरीब आदिवासी परिवार का बच्चा भी डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना पूरा कर सके।

'विकसित छत्तीसगढ़' के निर्माण का संकल्प और स्वतंत्रता दिवस का जश्न

स्वतंत्रता दिवस के इस राष्ट्रीय पर्व के मौके पर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों, तहसीलों और गांवों में तिरंगा फहराने के कार्यक्रम धूमधाम से आयोजित किए गए। राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों और देशभक्ति गीतों ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन के अंत में राज्य के सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपनी व्यक्तिगत और राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर 'विकसित छत्तीसगढ़' के निर्माण में अपना पूर्ण सहयोग दें। उन्होंने कहा कि हमारे अमर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस स्वतंत्र, समृद्ध और शांतिपूर्ण भारत की कल्पना की थी, उसे धरातल पर उतारना ही हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।

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