पश्चिम एशिया में युद्ध की तपिश के बीच भारत का 'एनर्जी सुरक्षा चक्र': रिफाइनरियों के लिए LPG उत्पादन का नया रिकॉर्ड कोटा तय, 63,810 टन प्रतिदिन का लक्ष्य

पश्चिम एशिया में युद्ध की तपिश के बीच भारत का 'एनर्जी सुरक्षा चक्र': रिफाइनरियों के लिए LPG उत्पादन का नया रिकॉर्ड कोटा तय, 63,810 टन प्रतिदिन का लक्ष्य

मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में ईरान और सहयोगी ताकतों के बीच जारी लंबे सैन्य टकराव और फारस की खाड़ी के संकरे समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में उत्पन्न व्यवधान ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में गंभीर अस्थिरता पैदा कर दी है। भारत के लिए यह भू-राजनीतिक उथल-पुथल सीधे तौर पर राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी हुई है, क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में देश अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल, 50 प्रतिशत से ज्यादा प्राकृतिक गैस (LNG) और लगभग 60 से 64 प्रतिशत एलपीजी (LPG) इन्हीं खाड़ी देशों के समुद्री रास्तों से आयात करता है।

होर्मुज गलियारे में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के $100 से $120 प्रति बैरल के संवेदनशील दायरे में पहुंचने के बाद भारत सरकार और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने किसी भी संभावित ईंधन संकट से निपटने के लिए एक बहुस्तरीय और आक्रामक 'ऊर्जा सुरक्षा रणनीति' पर अमल शुरू कर दिया है। सरकार की इस रणनीति का मुख्य फोकस घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन को दोगुना करना, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों (SPR) का तेजी से विस्तार करना, खाड़ी देशों के अलावा अन्य भौगोलिक क्षेत्रों से तेल-गैस का आयात बढ़ाना और घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध ईंधन उपलब्ध कराना है।

घरेलू एलपीजी उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल: 21 रिफाइनरियों के लिए तय हुआ उत्पादन कोटा

रसोई गैस की किसी भी संभावित किल्लत को रोकने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाते हुए देश की सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की सभी 21 प्रमुख रिफाइनरियों व अपस्ट्रीम उत्पादक कंपनियों के लिए अधिकतम एलपीजी उत्पादन लक्ष्य (Production Targets) निर्धारित कर दिए हैं।

इस आदेश के तहत देश की कुल दैनिक घरेलू एलपीजी उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 63,810 टन प्रतिदिन तय किया गया है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष के दैनिक औसत उत्पादन (लगभग 35,900 टन प्रतिदिन) से लगभग दोगुना है और देश की कुल दैनिक खपत (करीब 91,000 टन) के 70 प्रतिशत हिस्से को अकेले घरेलू स्रोतों से पूरा करने में सक्षम है।

रिफाइनरियों के इस नए आवंटन में सबसे बड़ा जिम्मा निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) को सौंपा गया है। रिलायंस की जामनगर स्थित रिफाइनरी को संकट के समय प्रतिदिन 18,000 टन तक एलपीजी का उत्पादन करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), मंगलोर रिफाइनरी (MRPL) और ओएनजीसी (ONGC) को अपने प्रोपेन और ब्यूटेन के स्टॉक को पूरी तरह से एलपीजी निर्माण में डाइवर्ट करने के आपातकालीन अधिकार लागू किए गए हैं। इस कदम से आयात पर भारत की निर्भरता तुरंत घटकर आधी से भी कम रह जाएगी।

आपूर्ति का रणनीतिक विविधीकरण: अमेरिका, लैटिन अमेरिका और रूस से बढ़े अनुबंध

खाड़ी देशों पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को कम करने के लिए भारत ने अपनी तेल और गैस खरीद का व्यापक भौगोलिक विविधीकरण (Supply Diversification) किया है:

  • अमेरिका और लैटिन अमेरिका से एलपीजी व क्रूड: भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका (US), ब्राजील और गुयाना से कच्चे तेल की खरीद में आक्रामक बढ़ोतरी की है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में व्यवधान के बाद लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की कमी को पूरा करने के लिए अर्जेंटीना और अल्जीरिया से एलपीजी आयात को दोगुना कर दिया गया है।

  • रूस से रियायती तेल की निरंतरता: पश्चिमी प्रतिबंधों और भुगतान तंत्र की जटिलताओं के बावजूद भारत ने अपने पारंपरिक और गैर-पारंपरिक समुद्री मार्गों (चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर) के जरिए रूसी कच्चे तेल की आवक को बनाए रखा है, जिससे घरेलू रिफाइनरियों को लगातार कच्चा माल मिल रहा है।

  • लंबी अवधि के अनुबंध: सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्पॉट मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए पश्चिमी अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी उत्पादकों के साथ दीर्घकालिक (Long-term) फिक्स्ड आपूर्ति समझौते साइन करें।

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) का विस्तार: आपातकालीन बफर की मजबूती

किसी भी युद्ध या समुद्री नाकेबंदी की स्थिति में देश के पास कितने दिनों का तेल मौजूद है, यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे संवेदनशील पैमाना होता है। भारत के पास वर्तमान में विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश), मंगलुरु (कर्नाटक) और पादुर (कर्नाटक) में कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) की क्षमता वाले भूमिगत रणनीतिक कच्चे तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) मौजूद हैं।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, भारत के पास रिफाइनरी इन्वेंट्री, पाइपलाइन स्टॉक, डिपो और सामरिक भंडारों को मिलाकर लगभग 69 दिनों की कच्चे तेल और एलएनजी की खपत का सुरक्षित बफर मौजूद है, जबकि एलपीजी का स्टॉक लगभग 45 दिनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

इसके साथ ही, सरकार ने संकट को देखते हुए एसपीआर फेज-2 (SPR Phase II) परियोजना को फास्ट-ट्रैक कर दिया है। इसके तहत ओडिशा के चांदीखोल में 4.0 MMT और कर्नाटक के पादुर में 2.5 MMT की अतिरिक्त वाणिज्यिक व रणनीतिक भूमिगत गुफाओं के निर्माण कार्य को तेज गति से पूरा करने के लिए बजटीय आवंटन जारी किया गया है।

ऑपरेशन संकल्प: होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नौसेना का सुरक्षा कवच

समुद्री व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में अपने विशेष मिशन 'ऑपरेशन संकल्प' (Operation Sankalp) के तहत युद्धपोतों की तैनाती को अत्यधिक सघन कर दिया है।

भारतीय नौसेना के गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक (Destroyers) और फ्रिगेट्स भारतीय ध्वज वाले मर्चेंट जहाजों, विशेष रूप से विशाल तेल टैंकरों (Crude Tankers) और एलपीजी कैरियर्स को होर्मुज के अशांत जलक्षेत्र से सुरक्षित निकालने के लिए एस्कॉर्ट प्रदान कर रहे हैं। नौसेना का 'इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर - इंडियन ओशन रीजन' (IFC-IOR) 24x7 रियल-टाइम मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस साझा कर रहा है, जिससे भारतीय जहाजों को किसी भी ड्रोन, मिसाइल या सी-माइन के खतरे से पहले ही सतर्क किया जा सके।

पीएनजी (PNG) और वैकल्पिक ऊर्जा की ओर तेज बदलाव: घरेलू मांग प्रबंधन

आयातित एलपीजी पर दबाव को स्थायी रूप से कम करने के लिए केंद्र सरकार ने शहरी और कस्बाई इलाकों में 'पाइप्ड नेचुरल गैस' (PNG) नेटवर्क के विस्तार को राष्ट्रीय अभियान का रूप दिया है:

  • लाखों घरों का पीएनजी में रूपांतरण: पिछले कुछ हफ्तों के भीतर ही 4 लाख से अधिक नए उपभोक्ताओं को सीधे पीएनजी नेटवर्क से जोड़ा गया है और चार लाख से ज्यादा नए पंजीकरण किए गए हैं। इससे एलपीजी सिलेंडरों की मांग में कमी आई है और सिलेंडर उन ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों के लिए आरक्षित किए जा रहे हैं जहां पाइपलाइन नेटवर्क नहीं है।

  • कमर्शियल सप्लाई का प्राथमिकता प्रबंधन: औद्योगिक और गैर-जरूरी वाणिज्यिक क्षेत्रों की तुलना में घरेलू उपभोक्ताओं, अस्पतालों, फार्मास्युटिकल यूनिट्स, कोल्ड स्टोरेज और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को एलपीजी आवंटन में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

  • एथेनॉल और बायो-सीएनजी का योगदान: पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) के सफल क्रियान्वयन और कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट्स की बढ़ती संख्या ने कच्चे तेल के आयात बिल में सालाना हजारों करोड़ रुपयों की बचत कराई है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार और ऊर्जा स्वतंत्रता दोनों को संबल मिला है।

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