आस्था की आड़ में घिनौना खेल: बीमारी ठीक करने के नाम पर महिला का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न

आस्था की आड़ में घिनौना खेल: बीमारी ठीक करने के नाम पर महिला का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न

धर्म, आस्था और अंधविश्वास की आड़ में मासूम और मजबूर लोगों की लाचारी का फायदा उठाने वाले ढोंगी तांत्रिकों और तथाकथित रूहानी हकीमों के खिलाफ पुलिस का कड़ा प्रहार जारी है। एक सनसनीखेज मामले में पुलिस ने तंत्र-मंत्र, झाड़-फूंक और असाध्य बीमारी के इलाज के नाम पर एक असहाय महिला के साथ अश्लीलता, छेड़छाड़ और आपराधिक धमकी देने के गंभीर आरोप में स्थानीय दरगाह के एक मौलवी को रंगे हाथों धर दबोचा है। आरोपी मौलवी पीड़िता को बीमारी और पारिवारिक विपत्ति से मुक्ति दिलाने का झूठा झांसा देकर लगातार मानसिक रूप से डरा रहा था और 'विशेष रूहानी क्रिया' के बहाने उसे रात के अंधेरे में दरगाह के एकांत कमरे में बुलाकर अनुचित दबाव बना रहा था।

पीड़िता की लिखित शिकायत और प्राथमिक जांच में जुटाए गए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने त्वरित संज्ञान लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत और गैर-जमानती धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। इसके बाद एक विशेष पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस की इस तत्परता से जहां पीड़िता को न्याय की आस मिली है, वहीं क्षेत्र के अन्य लोगों के बीच भी ढोंगी तांत्रिकों के चंगुल से बचने को लेकर जागरूकता बढ़ी है।

अंधविश्वास का जाल और डराने की साजिश: कैसे बनाया गया पीड़िता को शिकार?

पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार, पीड़िता पिछले काफी समय से गंभीर शारीरिक अस्वस्थता और पारिवारिक संकटों के दौर से गुजर रही थी। कई डॉक्टरों और अस्पतालों से इलाज कराने के बावजूद जब उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली, तो किसी परिचित के कहने पर उसने दरगाह में तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक का दावा करने वाले इस मौलवी से संपर्क साधा। शुरुआत में आरोपी ने महिला को अपने मीठे और सहानुभूति भरे शब्दों के जाल में फंसाया और दावा किया कि उसके ऊपर किसी 'अदृश्य साए' या 'काले जादू' का भयानक असर है, जिसे सामान्य दवाओं से ठीक नहीं किया जा सकता।

धीरे-धीरे आरोपी ने महिला के मन में भय का ऐसा माहौल खड़ा कर दिया कि यदि उसने उसकी बताई गई क्रियाएं पूरी नहीं कीं, तो उसके बच्चों और परिवार पर जानलेवा संकट आ सकता है। इसी मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा उठाकर मौलवी ने पहले ताबीज, विशेष तेल और पूजा-अनुष्ठान के नाम पर हजारों रुपयों की अवैध वसूली की। इसके बाद उसने महिला से कहा कि बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए 'मध्य रात्रि की विशेष रूहानी इबादत' जरूरी है, जिसके लिए उसे अकेले ही दरगाह परिसर में बने एक बंद कमरे में आना होगा। जब महिला मजबूरीवश वहां पहुंची, तो आरोपी ने उसके साथ अशोभनीय हरकतें और अश्लीलता शुरू कर दी।

अंधविश्वास का जाल, आधी रात का खौफनाक खेल और पुलिस की सख्त कार्रवाई: कैसे बेनकाब हुआ ढोंगी मौलवी?

महिला द्वारा मौलवी की नापाक हरकतों का कड़ा विरोध करने पर आरोपी अपने असली और आक्रामक रूप में आ गया। उसने पीड़िता को धमकी दी कि उसके पास तंत्र विद्या की ऐसी शक्तियां हैं जिससे वह उसके पूरे परिवार को बर्बाद कर देगा। साथ ही उसने यह भी धमकी दी कि यदि उसने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो वह समाज में उसकी बदनामी करवा देगा। लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक प्रताड़ना से त्रस्त होकर पीड़िता ने आखिरकार हिम्मत जुटाई और अपने परिवार के सदस्यों को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया।

परिजनों के सहयोग से मामला तत्काल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया। पुलिस उपाधीक्षक और थाना प्रभारी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए महिला पुलिस अधिकारियों की निगरानी में पीड़िता का विस्तृत बयान दर्ज कराया। पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), चैट्स और दरगाह के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को फॉरेंसिक साक्ष्य के तौर पर जब्त किया। पुख्ता सबूत हाथ लगते ही पुलिस ने छापेमारी कर आरोपी को धर दबोचा। पूछताछ के दौरान आरोपी ने तंत्र-मंत्र के नाम पर पहले भी कई महिलाओं को बरगलाने और उनसे पैसे ऐंठने की बात स्वीकार की है।

कानूनी शिकंजा: BNS की गंभीर धाराओं के तहत दर्ज हुआ मुकदमा

आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत कई गंभीर और गैर-जमानती प्रावधानों में मुकदमा पंजीकृत किया गया है:

  • महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना और शीलभंग का प्रयास (Section 74/75 BNS): किसी महिला की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करने के तहत मामला दर्ज किया गया।

  • धोखाधड़ी और कपटपूर्ण इरादा (Section 318 BNS): तंत्र-मंत्र और जादुई इलाज का झूठा दावा कर धन उगाही करने के आरोप में धोखाधड़ी की धाराएं लगाई गई हैं।

  • आपराधिक धमकी और ब्लैकमेलिंग (Section 351 BNS): पीड़िता और उसके परिवार को जान से मारने या सामाजिक रूप से अपमानित करने की धमकी देने का अपराध।

  • अंधविश्वास विरोधी अधिनियम के प्रावधान: कई राज्यों में लागू काला जादू और अंधविश्वास विरोधी अधिनियमों के तहत किसी बीमारी का अलौकिक या तांत्रिक इलाज करने का झूठा दावा करना भी दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे अदालत में मामले की फास्ट-ट्रैक सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सभी वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को समय पर चार्जशीट में शामिल करेंगे ताकि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।

आस्था और अंधविश्वास का अंतर: क्यों आसानी से फंस जाते हैं पीड़ित?

समाजशास्त्री और मनोवैज्ञानिक इस बात पर जोर देते हैं कि जब कोई व्यक्ति या उसका परिवार लंबे समय तक किसी असाध्य रोग, डिप्रेशन, आर्थिक तंगी या वैवाहिक कलह से जूझ रहा होता है, तो उसका तार्किक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण कमजोर पड़ने लगता है। ऐसी लाचारी के पलों में लोग 'चमत्कार' की उम्मीद में ऐसे ठगों, तांत्रिकों और नीम-हकीमों के जाल में आसानी से फंस जाते हैं।

ढोंगी तांत्रिक अक्सर पीड़िता को अपने परिवार से अलग-थलग करने की कोशिश करते हैं और उन्हें 'गुप्त अनुष्ठान' के नाम पर अकेले में बुलाते हैं। वे भय, अपराधबोध और सामाजिक बदनामी के डर का एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार करते हैं, जिसके चलते अधिकांश पीड़ित लंबे समय तक शोषण सहने के बावजूद चुप्पी साधे रहते हैं। यह मामला इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब कोई पीड़ित चुप्पी तोड़कर कानून का सहारा लेता है, तो ऐसे अपराधियों का पूरा साम्राज्य ढह जाता है।

नागरिकों और महिलाओं के लिए पुलिस की महत्वपूर्ण एडवाइजरी

इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और चमत्कारिक दावों से पूरी तरह दूर रहें और निम्नलिखित सावधानियों का कड़ाई से पालन करें:

  • बीमारी का इलाज केवल प्रमाणित डॉक्टरों से कराएं: किसी भी शारीरिक या मानसिक बीमारी के इलाज के लिए केवल रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स, स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स और अस्पतालों की सलाह लें; झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र से कोई बीमारी ठीक नहीं होती।

  • अकेले या असामान्य समय पर जाने से बचें: किसी भी धार्मिक स्थल, मजार, दरगाह या आश्रम में किसी भी व्यक्ति द्वारा रात के सन्नाटे में या अकेले में बुलाए जाने पर कभी न जाएं।

  • धमकी या ब्लैकमेल से डरने के बजाय तुरंत रिपोर्ट करें: यदि कोई व्यक्ति तंत्र-मंत्र या किसी गुप्त बात का हवाला देकर पैसे मांगता है या ब्लैकमेल करता है, तो घबराने के बजाय तत्काल अपने परिवार और पुलिस को सूचित करें।

  • महिला हेल्पलाइन का उपयोग करें: किसी भी आपात स्थिति या छेड़छाड़ की शिकायत के लिए राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर 112, महिला हेल्पलाइन 1090 (वूमेन पावर लाइन) या 181 पर तुरंत कॉल करें। आपकी पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है।

आस्था व्यक्तिगत विश्वास का विषय हो सकती है, लेकिन जब आस्था की आड़ में कानून का उल्लंघन, महिलाओं का उत्पीड़न और वित्तीय ठगी की जाने लगे, तो समाज और कानून दोनों का यह दायित्व बन जाता है कि वे ऐसे पाखंडियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें। पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई समाज में यह कड़ा संदेश देती है कि धर्म या चोले की आड़ में छिपकर किए जाने वाले अपराधों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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