छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम का अनूठा और भक्तिमय अंदाज
भारतीय राजनीतिक गलियारों में जब भी कोई बड़ा राजनेता या मंत्री किसी सार्वजनिक समारोह या धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होता है, तो अक्सर भारी-भरकम सुरक्षा और प्रोटोकॉल का माहौल देखने को मिलता है। लेकिन छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक अलग ही प्रशासनिक और सांस्कृतिक शैली देखने को मिलती है, जब राज्य के उप मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) विजय शर्मा ने आम जनता के बीच पहुंचकर एक साधारण श्रद्धालु की तरह दुर्गा पंडाल में शिरकत की। शारदीय नवरात्रि के इस पावन पर्व पर जब वे अचानक एक ग्रामीण इलाके के दुर्गा पंडाल में पहुंचे, तो उन्होंने किसी वीवीआईपी की तरह मंच पर बैठने के बजाय सीधे आम जनता और भजन मंडली के बीच जमीन पर बैठकर माहौल को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया।
पंडाल में पहुंचते ही थामा मंजीरा और शुरू कर दिया भजन गायन
मिली जानकारी के अनुसार, डिप्टी सीएम विजय शर्मा अपने तयशुदा कार्यक्रमों के दौरान एक स्थानीय दुर्गा पंडाल में माता के दर्शन करने के लिए पहुंचे थे। पंडाल में प्रवेश करते ही उन्होंने सबसे पहले माता रानी के चरणों में शीश झुकाकर प्रदेश की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इसके बाद जब उनकी नजर वहां बैठी स्थानीय भजन मंडली और कलाकारों पर पड़ी, तो वे खुद को रोक नहीं पाए। प्रोटोकॉल और सुरक्षा के घेरे को पीछे छोड़कर वे सीधे कलाकारों के पास जा बैठे और उनके हाथ से मंजीरा लेकर खुद ताल से ताल मिलाकर भजन गाने लगे। उनकी इस सहजता और सरल स्वभाव को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें खुली की खुली रह गईं।
झूम उठे ग्रामीण और गूंजने लगे माता के जयकारे
डिप्टी सीएम विजय शर्मा के हाथ में मंजीरा लेकर ठेठ छत्तीसगढ़ी और पारंपरिक अंदाज में भजन गाने की शैली ने वहां मौजूद भीड़ का दिल जीत लिया। पंडाल में मौजूद महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी उनके इस अनूठे रूप को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। देखते ही देखते पूरा पंडाल माता के जयकारों और भजनों की गूंज से सराबोर हो गया। ग्रामीण जनता के बीच जोश भरते हुए कई लोग अपनी जगह पर खड़े होकर झूमने लगे। राजनेता और जनता के बीच की इस पारदर्शी दूरी को मिटाते हुए जब एक प्रदेश का उप मुख्यमंत्री आम लोगों के साथ इस तरह घुल-मिलकर नाचने और गाने लगा, तो वहां का माहौल किसी बड़े पारिवारिक उत्सव जैसा हो गया।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है यह वीडियो
आज के डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में कोई भी अनूठी घटना पलभर में देश-दुनिया तक पहुंच जाती है। विजय शर्मा के इस भजन गाते हुए और मंजीरा बजाते हुए वीडियो को किसी ने अपने कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। देखते ही देखते यह वीडियो इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आग की तरह फैल गया। लोग इस वीडियो पर जमकर लाइक और कमेंट कर रहे हैं। अधिकांश यूजर्स का कहना है कि राजनेताओं को अपनी संस्कृति और जमीन से जुड़े रहने का ऐसा ही उदाहरण पेश करना चाहिए, जिससे आम जनता के साथ उनका सीधा जुड़ाव महसूस हो सके।
संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव का संदेश देता है यह आयोजन
छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में पर्व और त्यौहारों का विशेष महत्व रहा है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में गांवों से लेकर शहरों तक माता के पंडाल सजते हैं, जहां रातभर जागरण और भजनों का दौर चलता है। ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सत्ता के शीर्ष पर बैठे किसी जनप्रतिनिधि का इस रूप में शामिल होना इस बात का प्रतीक है कि वे अपनी जड़ों और परंपराओं को भूले नहीं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि इस तरह की सहज गतिविधियां नेताओं और जनता के बीच के फासले को कम करती हैं और समाज में एक सकारात्मक संदेश प्रसारित करती हैं।
जनता के बीच से निकले नेता की अनूठी शैली बनी चर्चा का विषय
विजय शर्मा अपने जन-सरोकार और जमीनी मुलाकातों के लिए पहले से ही जाने जाते रहे हैं। उनका यह अंदाज कोई नया नहीं है, बल्कि वे अक्सर आम जनता के सुख-दुख में इसी तरह बिना किसी तामझाम के शामिल होते हैं। दुर्गा पंडाल में उनका यह भक्तिमय रूप न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस बात की सराहना कर रहे हैं कि व्यस्त राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच भी कैसे एक नेता अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आस्था के लिए समय निकाल लेता है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सादगी और अपनापन ही किसी जननेता की सबसे बड़ी पूंजी होती है।