उत्तर प्रदेश के दो बड़े शहरों में विजयादशमी का भव्य उल्लास
असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक पावन पर्व विजयादशमी यानी दशहरा देश भर में बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर में दशहरे के मेलों और रावण दहन की रौनक हमेशा से ही अनूठी और ऐतिहासिक रही है। जैसे-जैसे दशमी का दिन नजदीक आता है, लोगों के मन में उत्साह और मेलों को घूमने की उत्सुकता चरम पर पहुंच जाती है। यदि आप भी इस बार लखनऊ या कानपुर में परिवार के साथ रावण दहन और भव्य आतिशबाजी का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो घर से निकलने से पहले शहर के प्रमुख मेलों, मैदानों और पुतला दहन के सही समय की जानकारी होना बेहद जरूरी है ताकि आपको अंतिम समय में ट्रैफिक या भीड़भाड़ के कारण किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
नवाबों के शहर लखनऊ में रावण दहन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के शहर लखनऊ में दशहरे के पावन अवसर पर कई स्थानों पर विशालकाय पुतले जलाए जाते हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। इनमें सबसे पहला और ऐतिहासिक नाम ऐशबाग रामलीला मैदान का आता है, जहां सदियों पुरानी परंपरा के तहत देश के सबसे बड़े और भव्य पुतलों का दहन किया जाता है। ऐशबाग की रामलीला और रावण दहन की धूम देखने लायक होती है, जहां शाम को लगभग 5:30 बजे से 6:30 बजे के बीच रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले धू-धू कर जल उठते हैं। इसके अलावा लखनऊ के मानसरोवर पार्क (इको गार्डन के पास), महानगर रामलीला मैदान, निराला नगर, और आशियाना स्थित एलडीए स्टेडियम में भी बड़े स्तर पर मेलों और पुतला दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
कानपुर के परेड ग्राउंड और रामलीला मैदानों में उमड़ता है भारी जनसैलाब
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मैनचेस्टर कहे जाने वाले कानपुर महानगर में भी दशहरे का पर्व पूरे जोश और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। कानपुर में रावण दहन के मुख्य आकर्षणों में परेड ग्राउंड का ऐतिहासिक मेला सबसे ऊपर आता है, जहां हज़ारों की संख्या में लोग परिवार सहित पहुंचते हैं। परेड ग्राउंड के अलावा किदवई नगर, शास्त्री नगर, बर्रा, और पनकी क्षेत्र के बड़े मैदानों में भी रावण दहन के भव्य कार्यक्रम तय किए गए हैं। कानपुर में रावण दहन का मुख्य समय शाम को सूर्यास्त के ठीक बाद यानी लगभग 6:00 बजे से 7:00 बजे के बीच का होता है, जब पारंपरिक मंत्रोच्चार और आतिशबाजी के बीच रावण के पुतले का अंत किया जाता है। स्थानीय समितियों द्वारा इन मैदानों में सुरक्षा और प्रकाश व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं।
ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा के कड़े इंतजामों का रखना होगा ध्यान
लखनऊ और कानपुर जैसे महानगरों में दशहरे के दिन उमड़ने वाली भारी भीड़ और ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद रहता है। दशहरा मेलों के आसपास के मुख्य मार्गों को शाम के वक्त नो-विकल जोन घोषित कर दिया जाता है और वाहनों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थलों की व्यवस्था की जाती है। प्रशासन की ओर से आम जनता से बार-बार अपील की जाती है कि वे अपने निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें या फिर तय की गई पार्किंग में ही वाहन खड़ा करें। इसके अलावा, छोटे बच्चों के साथ मेला देखने आने वाले अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों में उनका विशेष ध्यान रखें ताकि किसी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
मेलों की अनूठी संस्कृति और खान-पान का चस्का
दशहरे के मेलों की बात हो और वहां मिलने वाली पारंपरिक चीजों और खान-पान का जिक्र न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। लखनऊ के ऐशबाग मैदान के बाहर मिलने वाली चाट-पकौड़ी, गुझिया, और कानपुर के मेलों की खास ठिठोली और रौनक बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के चेहरों पर मुस्कान ले आती है। मेलों में सजी सजी-धजी दुकानें, बच्चों के खिलौने, और रावण दहन से पहले होने वाली आतिशबाजी का नजारा इस त्योहार को और अधिक यादगार बना देता है। लोग आपस में गले मिलकर विजयादशमी की बधाइयां देते हैं और बुराई पर अच्छाई की इस जीत के पर्व को मिलकर सेलिब्रेट करते हैं।
समय से पहुंचें और सपरिवार लें इस भव्य उत्सव का आनंद
यदि आपने अभी तक यह तय नहीं किया है कि इस बार रावण दहन देखने के लिए किस मैदान पर जाना है, तो अपनी सुविधानुसार नजदीकी स्थल का चुनाव कर लें। लखनऊ के ऐशबाग या कानपुर के परेड ग्राउंड जैसे मुख्य आकर्षणों पर शाम ढलते ही पैर रखने की जगह नहीं बचती है, इसलिए बेहतर यही होगा कि आप तय समय से थोड़ा पहले ही अपने घर से निकलें। प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें, ट्रैफिक नियमों का सम्मान करें और अपने परिवार व दोस्तों के साथ इस ऐतिहासिक पर्व का भरपूर आनंद उठाएं। रावण दहन का यह पावन उत्सव हमारे जीवन से अहंकार और बुराइयों को मिटाने का संदेश देता है, आइए इस विजयादशमी पर हम सब मिलकर एक सकारात्मक समाज के निर्माण का संकल्प लें।