Chhattisgarh Naxal : खत्म हुआ पापा राव का खौफ 25 लाख के इनामी नक्सली कमांडर ने 17 साथियों संग किया सरेंडर
News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पिछले तीन दशकों से आतंक का पर्याय बना खूंखार नक्सली कमांडर पापा राव उर्फ मोंगा उर्फ चंद्राणा ने अंततः घुटने टेक दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित '31 मार्च 2026' की डेडलाइन से महज एक सप्ताह पहले, पापा राव ने अपने 17 हथियारबंद साथियों के साथ बीजापुर जिला मुख्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया। छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षा बलों के लिए इसे नक्सलवाद के खिलाफ युद्ध में 'अंतिम कील' माना जा रहा है, क्योंकि पापा राव बस्तर संभाग का आखिरी सबसे बड़ा सक्रिय कमांडर था।
ताड़मेटला नरसंहार का मास्टरमाइंड, 45 से ज्यादा संगीन मामले पापा राव केवल एक नाम नहीं, बल्कि माओवादी संगठन की 'दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी' (DKSZC) का एक स्तंभ था। उस पर 76 जवानों की शहादत वाले साल 2010 के ताड़मेटला (दंतेवाड़ा) हमले की साजिश रचने का मुख्य आरोप है। इसके अलावा, वह जनवरी 2025 में बीजापुर के अंबली में हुए हमले सहित कुल 45 से अधिक हिंसक वारदातों में वांछित था। छत्तीसगढ़ सरकार ने उसकी गिरफ्तारी पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
"अब कोई बड़ा चेहरा बाकी नहीं" – डिप्टी सीएम विजय शर्मा प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस सरेंडर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, "मैंने स्वयं पापा राव से फोन पर बात की है। उसकी विचारधारा अब बदल चुकी है। उसने स्वीकार किया कि हिंसा के रास्ते से कुछ हासिल नहीं होने वाला।" मंत्री ने स्पष्ट किया कि पापा राव के सरेंडर के साथ ही बस्तर में माओवादियों का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। अब छत्तीसगढ़ के पास निर्धारित समय सीमा के भीतर 'सशस्त्र नक्सलवाद' से मुक्त होने का स्वर्णिम अवसर है।
हथियारों का जखीरा सौंपा, मुख्यधारा में हुए शामिल सरेंडर के दौरान पापा राव और उसके दस्ते ने AK-47, SLR और इंसास जैसे अत्याधुनिक विदेशी हथियारों का बड़ा जखीरा पुलिस के सुपुर्द किया। सरेंडर करने वालों में डिवीजनल कमेटी के सदस्य प्रकाश माडवी और अनिल ताती जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। पुलिस महानिरीक्षक (Bastar Range) सुंदरराज पी. ने बताया कि पापा राव को राज्य की पुनर्वास नीति के तहत सभी लाभ दिए जाएंगे। बता दें कि नवंबर 2025 में एक मुठभेड़ में उसकी पत्नी उर्मिला के मारे जाने के बाद से ही वह संगठन के भीतर अलग-थलग पड़ गया था।
नक्सलवाद के 'अंत' की शुरुआत? सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पापा राव का आत्मसमर्पण एक 'कैस्केडिंग इफेक्ट' (क्रमिक प्रभाव) पैदा करेगा। जब संगठन का इतना बड़ा रणनीतिकार हथियार डाल देता है, तो निचले स्तर के कैडरों का मनोबल पूरी तरह टूट जाता है। पिछले दो वर्षों में गणेश उइके और हिड़मा जैसे बड़े नेताओं के खात्मे या सरेंडर के बाद, अब बस्तर में माओवादियों की पकड़ लगभग शून्य हो गई है। आगामी दिनों में कई और छोटे गुटों के सरेंडर की उम्मीद जताई जा रही है।