Chhattisgarh fertilizer Supply : खाद की किल्लत रोकने के लिए सरकार अलर्ट, किसानों को समय पर उर्वरक पहुंचाने की बड़ी तैयारी
News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इस संकट का सीधा असर भारत में उर्वरक (खाद) के आयात और घरेलू उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मुख्यमंत्री और कृषि विभाग ने राज्य के किसानों को खरीफ सीजन 2026 के लिए समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की है।
पश्चिम एशिया संकट का खाद पर असर क्यों?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 20% से 30% यूरिया आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है।
कच्चे माल की किल्लत: घरेलू स्तर पर यूरिया उत्पादन के लिए 'नेचुरल गैस' (LNG) की आवश्यकता होती है, जो मुख्य रूप से पश्चिम एशिया से आयात की जाती है। युद्ध के कारण गैस की आपूर्ति बाधित होने से उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
बढ़ती कीमतें: समुद्री रास्तों में जोखिम बढ़ने से माल ढुलाई (Freight) और बीमा खर्च में 25-30% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की कीमतें बढ़ रही हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष तैयारी
छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाकर राज्य के किसानों के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
पर्याप्त बफर स्टॉक का दावा: राज्य सरकार के अनुसार, खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही राज्य में खाद का पर्याप्त स्टॉक जमा कर लिया गया है। वर्तमान में देश और राज्य के पास पिछले साल की तुलना में 46% अधिक ओपनिंग स्टॉक मौजूद है।
समय से पहले वितरण की योजना: सोसायटियों और लैम्पस (LAMPS) के माध्यम से किसानों को मानसून आने से पहले ही खाद का उठाव करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि ऐन वक्त पर किल्लत की स्थिति न बने।
वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान: केंद्र सरकार अब ओमान, सऊदी अरब और मोरक्को जैसे देशों के साथ लंबी अवधि के समझौतों पर काम कर रही है ताकि आपूर्ति सुचारू रहे।
नैनो यूरिया को बढ़ावा: सरकार किसानों को 'नैनो यूरिया' और जैविक खादों के उपयोग के लिए जागरूक कर रही है, क्योंकि नैनो यूरिया का उत्पादन पूरी तरह स्वदेशी है और यह विदेशी आयात पर निर्भर नहीं है।
किसानों के लिए सलाह
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद की कालाबाजारी या किल्लत की अफवाहों पर ध्यान न दें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें बढ़ें, लेकिन किसानों को सब्सिडी वाले रेट पर ही खाद मिलती रहेगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग करें।