Chhattisgarh : कवर्धा में 66 आदिवासियों की घर वापसी भाजपा विधायक भावना बोहरा ने धोए पैर, तिलक लगाकर किया स्वागत
News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के कवर्धा (कबीरधाम) जिले से एक बड़ी सामाजिक सुर्खी सामने आई है। यहाँ सालों पहले ईसाई धर्म अपना चुके 20 परिवारों के 66 सदस्यों ने एक बार फिर सनातन धर्म को स्वीकार कर लिया है। इस दौरान आयोजित 'शुद्धिकरण' समारोह में क्षेत्रीय भाजपा विधायक भावना बोहरा ने हिस्सा लिया और घर वापसी करने वाले लोगों के पैर पखारकर (धोकर) उन्हें समाज की मुख्यधारा में स्वागत किया।
1. विधायक ने धोए पैर: "अपना सम्मान वापस मिला"
समारोह के दौरान विधायक भावना बोहरा ने एक-एक कर सभी ग्रामीणों के पैर धोए और उन्हें फूल-माला पहनाकर सम्मानित किया।
भावना बोहरा का बयान: विधायक ने कहा, "साजिश और लालच के तहत हमारे भाइयों को अपने पूर्वजों की परंपराओं से दूर कर दिया गया था। आज वे अपनी इच्छा से वापस आए हैं। पैर धोकर मैंने केवल उनका स्वागत नहीं किया, बल्कि यह जताने की कोशिश की है कि समाज में उनका स्थान सर्वोच्च है।"
शुद्धिकरण प्रक्रिया: घर वापसी करने वाले लोगों ने पूरे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की और जनेऊ धारण कर अपने मूल धर्म में लौटने का संकल्प लिया।
2. क्यों हुआ था धर्मांतरण? ग्रामीणों की आपबीती
समारोह में वापस लौटे ग्रामीणों ने बताया कि कुछ साल पहले गरीबी, बीमारी और अन्य प्रलोभनों के चलते मिशनरियों ने उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया था।
मूल जड़ों की याद: ग्रामीणों का कहना है कि वे भले ही ईसाई बन गए थे, लेकिन अपनी आदिवासी संस्कृति और कुल देवी-देवताओं से उनका लगाव कभी कम नहीं हुआ। हिंदू संगठनों और विधायक के संपर्क में आने के बाद उन्होंने सनातनी बनने का निर्णय लिया।
3. छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर सियासी घमासान
यह घटना छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के मुद्दे पर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है।
भाजपा का रुख: भाजपा शुरू से ही बस्तर और मैदानी इलाकों में हो रहे कथित 'अवैध धर्मांतरण' के खिलाफ मुखर रही है। साय सरकार ने धर्मांतरण रोकने के लिए कड़े कानून लाने के संकेत भी दिए हैं।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: विपक्षी दल इस तरह के कार्यक्रमों को 'ध्रुवीकरण' का हिस्सा बताते रहे हैं, हालांकि इस विशेष मामले पर स्थानीय स्तर पर शांतिपूर्ण स्थिति बनी हुई है।