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March 18 2026 05:51 pm

Chaitra Navratri 2026 : नवरात्रि में जौ का उगना देता है भविष्य के बड़े संकेत जानें क्या है जौ के रंग और लंबाई का रहस्य

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News India Live, Digital Desk: चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से शुरू हो रही है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ ही 'जौ' (Jau) बोने की परंपरा है। हिंदू धर्म में जौ को सृष्टि की पहली फसल माना गया है, जिसे 'जयंती' भी कहते हैं। मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में जौ जिस तरह से उगते हैं, वे हमारे आने वाले साल के सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य का संकेत देते हैं।

जौ के उगने से मिलने वाले 'शुभ' संकेत

तेजी से बढ़ना: यदि बोए गए जौ दो-तीन दिन में ही अंकुरित होकर तेजी से बढ़ने लगें, तो यह घर में सुख-समृद्धि और उन्नति का प्रतीक है।

हरा और सफेद रंग: अगर जौ का रंग नीचे से आधा पीला और ऊपर से आधा हरा हो, तो इसका अर्थ है कि आने वाले साल का आधा समय संघर्षपूर्ण और आधा समय सुखद रहेगा। वहीं, यदि जौ पूरी तरह से सफेद या चांदी जैसा चमकदार उगे, तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है और धन लाभ का संकेत देता है।

सीधा और घना उगना: यदि जौ सीधे और घने उगते हैं, तो यह परिवार में एकता और कार्यों में सफलता का सूचक है।

जौ के उगने से मिलने वाले 'अशुभ' संकेत

जौ का न उगना: यदि नौ दिनों के बाद भी जौ बहुत कम उगे या बिल्कुल न उगे, तो इसे भविष्य में आने वाली किसी बड़ी बाधा या मेहनत के अनुसार फल न मिलने का संकेत माना जाता है।

पीला और मुरझाया हुआ रंग: अगर जौ का रंग गहरा पीला है या वह उगते ही मुरझाने लगे, तो यह परिवार में बीमारी या आर्थिक तंगी की ओर इशारा करता है।

टेढ़ा-मेढ़ा उगना: यदि जौ आपस में उलझे हुए या टेढ़े-मेढ़े उगते हैं, तो यह मानसिक तनाव और घरेलू क्लेश का संकेत हो सकता है।

अशुभ संकेत मिलने पर क्या करें? (उपाय)

यदि आपके जौ अच्छे नहीं उगे हैं, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए आप निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:

क्षमा प्रार्थना: नवमी के दिन मां दुर्गा से अनजाने में हुई भूलचूक के लिए क्षमा मांगें।

दान-पुण्य: दशमी के दिन गरीब बच्चों या ब्राह्मणों को भोजन कराएं और यथाशक्ति दान दें।

हवन: मां दुर्गा के नाम का हवन करें और 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' मंत्र का जाप करें।

घटस्थापना 2026: सबसे शुभ मुहूर्त

कल 19 मार्च को घटस्थापना के लिए सबसे श्रेष्ठ समय सुबह 06:27 से 10:20 तक है। इसके अलावा, दोपहर में 12:05 से 12:53 तक (अभिजीत मुहूर्त) भी कलश स्थापना की जा सकती है।