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April 05 2026 07:56 am

Chaitra Amavasya 2026 : पितृ दोष से मुक्ति के लिए आज शाम जरूर करें दीप दान, जानें दीपक जलाने का सही नियम और दिशा

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News India Live, Digital Desk: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या की तिथि पितरों को समर्पित होती है। इस दिन किए गए तर्पण और दीप दान से पितृ तृप्त होते हैं और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

पितरों के लिए दीप दान के नियम (Deepak Upay)

आज शाम सूर्यास्त के बाद पितरों के निमित्त ये उपाय करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

दक्षिण दिशा में दीपक: अमावस्या की शाम को घर की दक्षिण दिशा (South Direction) में सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं। दक्षिण दिशा पितरों की दिशा मानी जाती है। दीपक जलाते समय मन में पितरों का ध्यान करें और उनसे सुख-शांति की प्रार्थना करें।

पीपल के पेड़ के पास: शाम के समय किसी पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ होता है। माना जाता है कि पीपल में पितरों का वास होता है। दीपक जलाने के बाद सात बार परिक्रमा करें।

घर के मुख्य द्वार पर: घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपक जलाएं। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती और पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।

ईशान कोण में घी का दीपक: घर के मंदिर या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में गाय के घी का दीपक जलाएं। इससे देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है।

नदी या जलाशय के पास: यदि संभव हो, तो किसी पवित्र नदी या जलाशय के पास दीप दान करें। यदि ऐसा संभव न हो, तो घर के पास किसी साफ स्थान या मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।

पितृ देवों को प्रसन्न करने के अन्य उपाय

पितृ तर्पण: आज सुबह स्नान के बाद जल में काले तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित करना चाहिए।

दान-पुण्य: अमावस्या पर सफेद वस्तुओं का दान (जैसे चावल, दूध, चीनी या सफेद वस्त्र) बहुत शुभ माना जाता है।

भोजन का अंश: आज के दिन गाय, कुत्ते और कौए के लिए भोजन का एक हिस्सा जरूर निकालें। इसे 'पंचबली भोग' का हिस्सा माना जाता है।

आज की अमावस्या क्यों है खास?

चैत्र अमावस्या हिंदू कैलेंडर के अमान्त मास की अंतिम तिथि है। इसके अगले दिन यानी 19 मार्च से हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) और चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। इसलिए, नए साल की शुरुआत से पहले पितरों का आशीर्वाद लेना जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है।