Exclusive Banking Fraud Compensation: ऑनलाइन फ्रॉड में डूबे पैसे वापस मिलेंगे! ₹25,000 तक के नुकसान पर मुआवजे का प्रस्ताव, समझें RBI, बैंक और ग्राहक के बीच देनदारी का पूरा गणित
देश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), नेट बैंकिंग और क्रेडिट/डेबिट कार्ड के बढ़ते चलन के साथ साइबर अपराधियों द्वारा वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Cyber Fraud) के मामलों में भी भारी इजाफा हुआ है। अक्सर फिशिंग लिंक्स, फर्जी कॉल या मैलवेयर के जरिए आम नागरिकों की गाढ़ी कमाई बैंक खातों से उड़ा ली जाती है।
छोटे खुदरा ग्राहकों और वरिष्ठ नागरिकों को साइबर ठगी के भारी नुकसान से बचाने के लिए वित्तीय तंत्र में ₹25,000 तक के अनधिकृत लेनदेन पर संस्थागत मुआवजा व सुरक्षा शील्ड प्रदान करने की व्यापक रूपरेखा पर काम किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि त्वरित सूचना देने पर निर्दोष खाताधारकों को अपनी पूरी जमा पूंजी से हाथ न धोना पड़े।
अनधिकृत लेनदेन पर दायित्व का वर्तमान ढांचा: RBI की 'सीरो लायबिलिटी' नीति
भारतीय रिजर्व बैंक के मौजूदा दिशानिर्देशों (Customer Liability in Unauthorised Electronic Banking Transactions) के तहत किसी भी वित्तीय धोखाधड़ी में नुकसान की भरपाई तीन मुख्य श्रेणियों पर निर्भर करती है:
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1. बैंक की तकनीकी खामी पर 100% शून्य देनदारी (Zero Liability):
यदि फ्रॉड बैंक के सिस्टम, सर्वर में सेंध या बैंक की आंतरिक लापरवाही के कारण हुआ है, तो ग्राहक की देनदारी शून्य होती है। पूरा नुकसान बैंक को वहन करना होता है, चाहे ग्राहक ने शिकायत तुरंत की हो या नहीं।
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2. थर्ड पार्टी ब्रीच (Third-Party Breach - 3 दिन का नियम):
यदि सिस्टम में कोई सुरक्षा चूक न तो ग्राहक की ओर से हुई और न ही बैंक की ओर से, बल्कि थर्ड पार्टी साइबर अटैक या डेटा ब्रीच के जरिए हुई:
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3 कार्य दिवसों के भीतर सूचना देने पर: ग्राहक की देनदारी पूरी तरह शून्य (Zero Liability) होती है और पूरा रिफंड बैंक को देना होता है।
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4 से 7 कार्य दिवसों के भीतर सूचना देने पर: ग्राहक की अधिकतम देनदारी लेनदेन मूल्य या ₹5,000 से ₹25,000 (खाते के प्रकार के आधार पर) के बीच सीमित (Limited Liability) कर दी जाती है।
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7 दिनों के बाद सूचना देने पर: देनदारी बैंक के बोर्ड द्वारा अनुमोदित आंतरिक नीति के आधार पर तय होती है।
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3. ग्राहक की प्रत्यक्ष लापरवाही (Customer Negligence):
यदि ग्राहक ने जानबूझकर अपना ओटीपी (OTP), सीवीवी (CVV), पिन या नेट बैंकिंग पासवर्ड किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा किया है, तो बैंक को सूचना देने तक का पूरा नुकसान ग्राहक का होता है। बैंक को अनधिकृत लेनदेन की सूचना मिलने के बाद होने वाले किसी भी आगे के ट्रांजैक्शन की जिम्मेदारी बैंक की होती है।
प्रस्तावित ₹25,000 तक के मुआवजे का गणित: कौन देगा कितने पैसे?
छोटे और मध्यम डिजिटल फ्रॉड (जो कुल साइबर अपराधों का 70% से अधिक हिस्सा हैं) के त्वरित निपटारे के लिए एक बहुस्तरीय 'सुरक्षा और इंश्योरेंस पूल' (Security & Fraud Insurance Pool) के मॉडल पर विचार किया जा रहा है:
| हितधारक (Entity) | प्रस्तावित भूमिका और देनदारी का अनुपात | कार्यप्रणाली |
| ग्राहक (Victim/Consumer) | ₹0 से ₹1,000 (शून्य या नाममात्र कटौती) | यदि ग्राहक ने घटना के 2 से 4 घंटे के भीतर 'गोल्डन ऑवर' में रिपोर्ट किया है, तो ग्राहक पर कोई आर्थिक भार नहीं डाला जाएगा। मामूली लापरवाही के मामलों में एक न्यूनतम टोकन कटौती (Deductible) हो सकती है। |
| बैंक और पेमेंट गेटवे (Issuing Bank & Aggregator) | 40% से 50% हिस्सेदारी | यदि बैंक के पास फ्रॉड प्रिवेंशन सिस्टम (जैसे सस्पेक्टेड अकाउंट फ्लैगिंग या असामान्य लोकेशन लॉगिन डिटेक्शन) की विफलता पाई जाती है, तो नुकसान का बड़ा हिस्सा संबंधित बैंक या पेमेंट एग्रीगेटर के आंतरिक प्रोविजनिंग फंड से कटेगा। |
| आरबीआई समर्थित डिपॉजिटर प्रोटेक्शन / फ्रॉड फंड | 30% से 40% हिस्सेदारी | केंद्रीय नियामक के तत्वावधान में बनने वाले विशेष साइबर सुरक्षा जोखिम पूल (Cyber Risk Mitigation Reserve) से सहायता प्रदान की जाएगी, जो बैंक और इंश्योरेंस कंपनियों के संयुक्त अंशदान से संचालित होगा। |
| साइबर इंश्योरेंस कवरेज (Inbuilt Insurance) | शेष बची राशि | बचत खातों और यूपीआई हैंडल के साथ इनबिल्ट माइक्रो-इंश्योरेंस कवरेज जोड़कर क्लेम सेटलमेंट को 10 से 15 दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा। |
फ्रॉड होते ही 'गोल्डन ऑवर' में ये 3 काम तुरंत करें
किसी भी प्रकार के ऑनलाइन फ्रॉड के बाद मुआवजे या रिफंड की संभावना तभी सबसे अधिक होती है जब पीड़ित त्वरित कदम उठाए:
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1. नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें: घटना के तुरंत बाद गृह मंत्रालय के हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें। इससे फ्रॉड ट्रांजैक्शन की वित्तीय ट्रेल ट्रैक होती है और ठग के खाते में पैसे को फ्रीज (Lien Mark) कर दिया जाता है।
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2. बैंक को औपचारिक सूचना दें (Service Request Number लें): तुरंत बैंक के 24x7 हेल्पलाइन, ऐप या नेट बैंकिंग के जरिए संबंधित डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई आईडी को ब्लॉक कराएं और अनधिकृत लेनदेन की औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं।
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3. लिखित शिकायत और पावती: नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराकर उसकी पावती (Acknowledgement Copy) बैंक को ईमेल के जरिए भेजें ताकि समय-सीमा का कानूनी रिकॉर्ड बना रहे।
बैंक को अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन की सूचना मिलने के बाद निर्धारित कार्य दिवसों के भीतर संबंधित राशि को ग्राहक के खाते में 'शैडो क्रेडिट' (अस्थायी जमा) के रूप में लौटाना होता है, जब तक कि आंतरिक जांच पूरी न हो जाए।