Bank PLI Scheme: बैंक कर्मचारियों के कड़े विरोध के आगे झुकी सरकार! सरकारी बैंकों में विवादित PLI स्कीम पर लगाई रोक; 11 सितंबर की देशव्यापी हड़ताल से पहले बड़ा फैसला
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (Public Sector Banks) में कर्मचारियों और केंद्र सरकार के बीच लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा लागू की जा रही नई परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना को केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए तत्काल प्रभाव से स्थगित (Hold / Kept in Abeyance) कर दिया है।
यह बड़ा फैसला केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भारतीय मजदूर संघ (BMS) से जुड़े बैंक कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद आया है। बैंक यूनियनों ने इस योजना में वरिष्ठ अधिकारियों और निचले संवर्ग के कर्मचारियों के बीच इंसेंटिव के भारी अंतर को 'विभाजनकारी और भेदभावपूर्ण' करार दिया था। 11 सितंबर को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) द्वारा बुलाई गई देशव्यापी बैंक हड़ताल से ठीक पहले सरकार के इस कदम को कर्मचारियों की बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है।
क्या थी विवाद की जड़? 15 दिन बनाम 365 दिन के वेतन का असमान फॉर्मूला
बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच इस असंतोष की मुख्य वजह सरकार द्वारा पेश किए गए नए पीएलआई ढांचे में मौजूद भारी असमानता थी:
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मूल द्विपक्षीय समझौता (IBA फॉर्मूला): नवंबर 2020 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनियनों के बीच हुए समझौते के तहत पीएलआई को बैंक के समग्र लाभ (Operating/Net Profit) से जोड़ा गया था। इसके तहत क्लर्क से लेकर स्केल-7 के शीर्ष अधिकारियों तक सभी कर्मचारियों को अधिकतम 15 दिन के बेसिक वेतन + डीए के बराबर एकसमान प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान था।
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सरकार का एकतरफा संशोधन (DFS स्कीम): वित्तीय सेवा विभाग ने 19 नवंबर 2024 को एकतरफा निर्देश जारी करते हुए स्केल-4 (चीफ मैनेजर) और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर 365 दिन (पूरे एक साल) के मूल वेतन तक का भारी-भरकम पीएलआई देने का नियम बना दिया।
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कर्मचारियों का विरोध: यूनियनों का तर्क था कि बैंक के 95% कर्मचारियों (क्लर्क, सब-स्टाफ और स्केल-1 से 3 के ब्रांच मैनेजर्स) को मात्र 15 दिन का इंसेंटिव और केवल 5% शीर्ष अफसरों को 12 महीने का बेसिक पे देना खुला भेदभाव है। इससे कार्यस्थलों पर टीम भावना खत्म होने और अस्वस्थ आंतरिक प्रतिस्पर्धा पैदा होने का गंभीर खतरा था।
दिल्ली हाईकोर्ट से लेकर लेबर कमिश्नर तक खिंचा था मामला
विवादित योजना के खिलाफ यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी और यह विवाद केंद्रीय मुख्य श्रम आयुक्त (CLC) के समक्ष भी सुलह प्रक्रिया के अधीन चल रहा था।
यूनियनों का सख्त ऐतराज इस बात पर था कि जब मामला अदालत और श्रम आयुक्त के पास विचाराधीन था, तब बैंकों ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए स्केल-3 तक तो भुगतान कर दिया, लेकिन स्केल-4 से ऊपर के लिए नए मनमाने नियम लागू करने का दबाव बनाया जा रहा था। कर्मचारी संगठनों ने इसे द्विपक्षीय समझौतों (Bipartite Settlement) की वैधानिक मर्यादा का खुला उल्लंघन करार दिया था।
वित्त मंत्रालय का आधिकारिक रुख: द्विपक्षीय वार्ता में सुलझेगा मसला
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, कर्मचारियों की चिंताओं और ज्ञापनों का संज्ञान लेते हुए 19 नवंबर 2024 के पीएलआई परिपत्र को वर्ष 2025-26 के लिए रोक दिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि:
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अब इस प्रोत्साहन योजना की पूरी समीक्षा चल रही द्विपक्षीय समझौते (Bipartite Settlement / Joint Note) की औपचारिक बैठकों के दौरान की जाएगी।
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सरकार बैंकिंग क्षेत्र, ग्राहकों और कर्मचारियों के व्यापक हित में 'संवाद और आपसी समझ' के जरिए एक पारदर्शी और सर्वमान्य फॉर्मूला तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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बैठक में सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारियों की चिकित्सा बीमा सुविधाओं और एक्स-ग्रेशिया पेंशन पुनरीक्षण जैसे मुद्दों पर भी विचार का भरोसा दिया गया है।
सरकार के फैसले के क्या हैं मायने? 11 सितंबर की हड़ताल पर क्या होगा असर?
इस फैसले के कई दूरगामी राजनीतिक और प्रशासनिक मायने निकाले जा रहे हैं:
पहला, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काम करने वाले करीब 8 लाख कर्मचारियों की सामूहिक एकता और हड़ताल के दबाव के आगे केंद्र सरकार को अपना एकतरफा फैसला टालने पर मजबूर होना पड़ा है।
दूसरा, 11 सितंबर को प्रस्तावित देशव्यापी बैंक हड़ताल की प्रमुख मांगों में पीएलआई योजना को रद्द करना शामिल था। हालांकि, यूनियनों की सबसे बड़ी और लंबित मांग '5-डे बैंकिंग' (सप्ताह में पांच दिन काम और शनिवार की पूर्ण छुट्टी) को सरकार ने अभी तक आधिकारिक मंजूरी नहीं दी है। इसके साथ ही 28 से 30 सितंबर और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का नोटिस भी प्रभावी है।
अब सबकी निगाहें यूएफबीयू (UFBU) के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या पीएलआई पर रोक लगने के बाद 11 सितंबर की हड़ताल टलेगी या 5-दिवसीय बैंकिंग और पेंशन अपडेशन की मांग को लेकर बैंककर्मी सड़कों पर उतरेंगे।
| विवादित बिंदु | द्विपक्षीय समझौता (यूनियनों की मांग) | विवादित DFS सरकारी स्कीम (जिस पर रोक लगी) |
| प्रोत्साहन का आधार | बैंक का कुल वित्तीय प्रदर्शन व लाभ | व्यक्तिगत प्रदर्शन (Individual Appraisal) |
| पात्रता दायरा | सभी कर्मचारी व स्केल-1 से 7 तक एकसमान | केवल स्केल-4 से स्केल-7 के अफसरों को विशेष लाभ |
| अधिकतम भुगतान | 15 दिनों का मूल वेतन + DA | 365 दिनों (12 माह) तक का मूल वेतन |
| वर्तमान स्थिति | बहाल रखने की मांग | सरकार द्वारा 2025-26 के लिए स्थगित (Hold) |