Credit Card Closure Delay Penalty: बैंक नहीं बंद कर रहा आपका क्रेडिट कार्ड? जानिए RBI का कड़ा नियम, 7 दिन की देरी होते ही आपको रोज मिलेंगे ₹500!
नया क्रेडिट कार्ड बेचते समय बैंक और वित्तीय संस्थान ग्राहकों को दिन में कई बार फोन कर लुभावने ऑफर्स देते हैं, लेकिन जब कोई ग्राहक उपयोग न होने वाले कार्ड को हमेशा के लिए बंद (Cancel/Close) कराना चाहता है, तो अक्सर उसे जटिल प्रक्रियाओं, रिटेंशन कॉल्स और कस्टमर केयर के टालमटोल का सामना करना पड़ता है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है या बैंक आपकी कैंसिलेशन रिक्वेस्ट पर हफ्तों तक कुंडली मारकर बैठा है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का एक बेहद सख्त नियम सीधे तौर पर आपके आर्थिक अधिकार की रक्षा करता है।
आरबीआई के मास्टर डायरेक्शन के अनुसार, यदि तय समय-सीमा के भीतर बैंक आपका क्रेडिट कार्ड बंद करने में नाकाम रहता है, तो उसे अपनी जेब से आपको प्रतिदिन ₹500 का हर्जाना (Compensation) देना होगा।
क्या है RBI का 7 दिन वाला नियम और ₹500 का दैनिक हर्जाना?
भारतीय रिजर्व बैंक के 'मास्टर डायरेक्शन ऑन क्रेडिट कार्ड एंड डेबिट कार्ड (इश्यूएंस एंड कंडक्ट) डायरेक्शंस' के पैराग्राफ 8 में क्रेडिट कार्ड बंद करने की स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है:
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7 कार्य दिवसों की डेडलाइन: कार्डधारक की ओर से औपचारिक आवेदन मिलने के बाद कार्ड जारीकर्ता बैंक या कंपनी को अधिकतम 7 वर्किंग डेज (कार्य दिवस) के भीतर कार्ड को अनिवार्य रूप से बंद करना होगा।
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8वें दिन से ₹500 रोज की पेनल्टी: यदि बैंक 7 कार्य दिवसों में खाता बंद करने में विफल रहता है, तो 8वें दिन से पेनल्टी मीटर शुरू हो जाता है। बैंक को तब तक ₹500 प्रति कैलेंडर दिन के हिसाब से ग्राहक के खाते में हर्जाना जमा करना होगा, जब तक कि कार्ड औपचारिक रूप से क्लोज न हो जाए।
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लाखों रुपये तक का मुआवजा: हाल ही में ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां बैंक द्वारा महीनों तक क्लोजर रिक्वेस्ट पेंडिंग रखने पर बैंकिंग लोकपाल ने बैंक को ग्राहक को ₹3 लाख से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया।
₹500 प्रतिदिन का मुआवजा पाने के लिए ये 3 शर्तें पूरी होना जरूरी
इस कानूनी अधिकार और मुआवजे का दावा आप तभी मजबूती से कर सकते हैं, जब आपने अपनी ओर से प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं सही रखी हों:
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1. बकाया राशि शून्य (Zero Balance) होना अनिवार्य: कार्ड बंद करने का अनुरोध भेजते समय आपके कार्ड पर कोई भी बिल, पेंडिंग ईएमआई (EMI), वार्षिक मेंटेनेंस चार्ज या बिना बिल वाला खर्च बाकी नहीं होना चाहिए। यदि खाते में ₹1 का भी बकाया रह गया, तो बैंक तकनीकी आधार पर हर्जाने से इनकार कर सकता है।
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2. लिखित/डिजिटल रिकॉर्ड और टिकट नंबर: केवल मौखिक फोन कॉल पर भरोसा न करें। हमेशा आधिकारिक मोबाइल बैंकिंग ऐप, नेट बैंकिंग या बैंक के अधिकृत शिकायत ईमेल पते के जरिए कार्ड बंद करने का अनुरोध भेजें। आवेदन के बाद मिलने वाला सर्विस रिक्वेस्ट (SR) नंबर, पावती या ईमेल का स्क्रीनशॉट संभालकर रखें, क्योंकि यही तारीख का आधिकारिक प्रमाण होगा।
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3. रिवॉर्ड पॉइंट्स रिडीम करने का अधिकार: आरबीआई नियमों के तहत कार्ड जारीकर्ता को कार्ड बंद होने पर कार्ड में मौजूद वैध रिवॉर्ड पॉइंट्स को भुनाने (Redeem) के लिए कार्डधारक को कम से कम 30 दिनों का समय देना अनिवार्य है।
बैंक शाखा (Branch) के चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं कर सकता
अक्सर बैंक शाखा प्रबंधक ग्राहकों से कहते हैं कि क्रेडिट कार्ड बंद कराने के लिए उन्हें होम ब्रांच आकर फॉर्म भरना होगा। आरबीआई ने अपनी गाइडलाइंस में साफ कर दिया है कि बैंक किसी भी ग्राहक को सिर्फ ब्रांच आने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।
बैंकों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप, समर्पित हेल्पलाइन, आईवीआर (IVR) और रजिस्टर्ड ईमेल जैसे डिजिटल माध्यमों पर वन-क्लिक क्लोजर का विकल्प देना अनिवार्य है। कार्ड सफलतापूर्वक बंद होने पर बैंक को तत्काल एसएमएस और ईमेल के माध्यम से कंफर्मेशन देना होता है। इसके साथ ही 30 दिनों के भीतर क्रेडिट ब्यूरो (CIBIL, Experian) को भी अकाउंट क्लोजर की सूचना भेजना बैंक की जिम्मेदारी होती है।
अगर बैंक 7 दिन बाद भी कार्ड बंद न करे और हर्जाना न दे, तो क्या करें?
यदि 7 कार्य दिवस बीत चुके हैं और आपका कार्ड अब भी एक्टिव दिख रहा है, तो इस स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया का पालन करें:
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स्टेप 1 (प्रिंसिपल नोडल ऑफिसर को ईमेल): बैंक के कस्टमर केयर के बजाय सीधे बैंक के 'प्रिंसिपल नोडल ऑफिसर' (Principal Nodal Officer - PNO) को ईमेल भेजें। इसमें अपना सर्विस टिकट नंबर, आवेदन की तारीख और "RBI Master Direction - Credit Card Paragraph 8" का हवाला देते हुए ₹500 प्रतिदिन के हर्जाने की मांग करें।
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स्टेप 2 (RBI बैंकिंग लोकपाल में ऑनलाइन शिकायत): यदि बैंक 30 दिनों के भीतर आपकी शिकायत का समाधान नहीं करता या मुआवजा देने से मना करता है, तो आप बिना किसी कानूनी खर्च के सीधे आरबीआई के कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल cms.rbi.org.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
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कार्रवाई: आरबीआई लोकपाल (Banking Ombudsman) दोनों पक्षों की जांच के बाद बैंक को क्लोजर की तारीख तक के पूरे दिनों का ₹500 प्रति दिन के हिसाब से मुआवजा ग्राहक के खाते में ट्रांसफर करने का आदेश देता है।