बिहार की राजनीति में भैया कल्चर पर ब्रेक? नितिन नवीन से मिलने वालों के लिए नया फरमान

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News India Live, Digital Desk : बिहार की राजनीति का अपना ही एक अलग अंदाज है। यहाँ नेता और कार्यकर्ता का रिश्ता अक्सर प्रोटोकॉल से ज्यादा अपनत्व पर टिका होता है। कार्यकर्ताओं के लिए उनके नेता जी अक्सर 'भैया', 'दादा' या 'चाचा' होते हैं। लेकिन, पटना के सियासी गलियारों में एक खबर ने इन दिनों सबका ध्यान खींचा है। अगर आप बिहार सरकार के कद्दावर मंत्री और बीजेपी नेता नितिन नवीन से मिलने की सोच रहे हैं, तो आपको अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।

बात दरअसल ये है कि नितिन नवीन से मिलने आने वाले लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक खास निर्देश जारी किया गया है। निर्देश साफ है "कृपया मंत्री जी को उनके नाम से न पुकारें।"

क्या है पूरा मामला?
आमतौर पर बीजेपी कार्यालय हो या मंत्री जी का आवास, वहाँ कार्यकर्ताओं की भीड़ लगी रहती है। पुराने साथी और कार्यकर्ता अक्सर उन्हें "नितिन" या "नितिन भैया" कहकर संबोधित कर देते हैं। लेकिन अब कहा जा रहा है कि ऐसा करने से पद की गरिमा को ठेस पहुँचती है। मंत्री जी के करीबियों और पार्टी के सिस्टम की तरफ से यह संदेश दिया गया है कि जब भी कोई उनसे मिले, तो संबोधन में 'माननीय मंत्री जी', 'सर' या पद के अनुरूप सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल करें।

शिष्टाचार या बढ़ा हुआ कद?
इस निर्देश के पीछे का तर्क भी बड़ा दिलचस्प है। पार्टी की तरफ से यह समझाने की कोशिश हो रही है कि नितिन नवीन अब केवल एक कार्यकर्ता या विधायक नहीं हैं, बल्कि उनके पास एक संवैधानिक पद है। ऐसे में उस कुर्सी और पद की एक गरिमा (Decorum) होती है। जब लोग, खासकर भीड़-भाड़ में या सार्वजनिक रूप से उन्हें सीधे नाम लेकर बुलाते हैं, तो यह उस सरकारी पद के प्रोटोकॉल के खिलाफ लगता है।

कार्यकर्ताओं के लिए थोड़ा मुश्किल!
अब जरा सोचिए उस कार्यकर्ता के बारे में जो नितिन नवीन के साथ तब से जुड़ा है जब वो मंत्री नहीं थे। बिहार में राजनीति का मतलब ही होता है—कंधे पर हाथ रखकर बात करना। ऐसे में अचानक "भैया" से "माननीय मंत्री जी" पर शिफ्ट होना थोड़ा औपचारिक और अजीब जरूर लग सकता है। कुछ लोगों को लग सकता है कि नेता जी अब "बड़े साहब" हो गए हैं, तो कुछ इसे अनुशासन का जरूरी हिस्सा मान रहे हैं।

यह बदलाव केवल एक निर्देश नहीं है, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक कार्यशैली की एक झलक भी है। जहाँ पहले देसीपन और अनौपचारिकता (Informality) हावी रहती थी, अब वहाँ कॉरपोरेट स्टाइल और सख्त प्रोटोकॉल जगह बना रहे हैं।

तो कुल मिलाकर बात ये है कि अगर अगली बार आपकी मुलाकात नितिन नवीन जी से हो, तो भावनाओं में बहकर सीधे नाम लेने से बचिएगा। याद रखिएगा, आप 'नितिन' से नहीं, बल्कि 'बिहार सरकार के एक जिम्मेदार मंत्री' से मिल रहे हैं। सम्मान में ही सुरक्षा है!