BREAKING:
April 20 2026 08:30 am

हजारीबाग ट्रेजरी में करोड़ों की सेंध 8 वर्षों में 15.41 करोड़ की अवैध निकासी का खुलासा, 3 पुलिसकर्मी गिरफ्तार

Post

News India Live, Digital Desk: झारखंड के हजारीबाग जिले से एक सनसनीखेज वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। बोकारो के बाद अब हजारीबाग जिला कोषागार (Treasury) में बड़ी वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है, जहां पिछले आठ वर्षों के दौरान योजनाबद्ध तरीके से 15 करोड़ 41 लाख रुपये की अवैध निकासी की गई है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

कैसे हुआ करोड़ों का 'खेल'?

शुरुआती जांच और ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, यह घोटाला साल 2018 से लगातार जारी था। जालसाजों ने सिस्टम की खामियों और 'कुबेर बिल मैनेजमेंट सिस्टम' पोर्टल की तकनीकी कमियों का फायदा उठाकर इस बड़ी रकम को निकाला।

फर्जी बिल और डुप्लीकेट वाउचर: एक ही अवधि के दौरान कई बार डुप्लीकेट बिल पास किए गए।

सैलरी बिल में हेरफेर: अलग-अलग ट्रेजरी वाउचर नंबरों का उपयोग कर एक ही राशि की बार-बार निकासी की गई।

मास्टर डेटा के साथ छेड़छाड़: पेरोल प्रोसेसिंग और कर्मचारियों के मास्टर डेटा में गलत मैपिंग के जरिए सरकारी धन को निजी खातों में ट्रांसफर किया गया।

3 पुलिसकर्मी गिरफ्तार, जांच के दायरे में कई अधिकारी

हजारीबाग उपायुक्त की त्वरित कार्रवाई के बाद इस मामले में मुख्य आरोपी माने जा रहे तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच टीम अब उन सभी कड़ियों को जोड़ रही है जिनकी मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी रकम की निकासी संभव नहीं थी। शक की सुई उन कर्मियों पर भी है जो पहले हजारीबाग पुलिस कार्यालय में तैनात थे और बाद में अन्य जिलों में अकाउंटेंट के पद पर गए।

बोकारो और धनबाद तक पहुंचा असर

हजारीबाग के साथ-साथ बोकारो जिले में भी 4.29 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला पहले ही सामने आ चुका है। इन दोनों बड़े घोटालों के बाद झारखंड के अन्य जिलों, विशेषकर धनबाद और गढ़वा में कोषागारों को 'अलर्ट मोड' पर डाल दिया गया है। वित्त विभाग ने सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDO) को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे केवल अकाउंटेंट के भरोसे न रहें और सर्विस बुक व वित्तीय अभिलेखों की स्वयं जांच करें।

विपक्ष हमलावर, सरकार सख्त

इस घोटाले को लेकर राज्य में सियासत भी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानू प्रताप शाही ने इस वित्तीय गबन के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार के ढीले नियंत्रण को जिम्मेदार ठहराया है। दूसरी ओर, सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी (CID) को जांच में शामिल करने के संकेत दिए हैं। बोकारो उपायुक्त ने अब नियम बना दिया है कि केवल अधिकृत 'ट्रेजरी मैसेंजर' ही बिल जमा करा सकेंगे, ताकि फर्जीवाड़े को रोका जा सके।