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March 27 2026 10:12 pm

बिहार की रफ्तार पर लगा ब्रेक केंद्र और राज्य के बीच फंसी 26 बड़ी परियोजनाएं, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का काम भी अटका

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News India Live, Digital Desk: बिहार के बुनियादी ढांचे और सड़कों के जाल को मजबूती देने वाले प्रोजेक्ट्स फिलहाल 'सियासी और तकनीकी' फाइलों में दबे नजर आ रहे हैं। केंद्र और बिहार सरकार के बीच एक विशेष शर्त को लेकर बनी असहमति के कारण प्रदेश की 26 महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं अधर में लटक गई हैं। इनमें बिहार का सबसे बहुप्रतीक्षित 'पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे' भी शामिल है। इस गतिरोध के कारण न केवल विकास की रफ्तार धीमी हुई है, बल्कि हजारों करोड़ के बजट के इस्तेमाल पर भी सवालिया निशान खड़ा हो गया है।

किस 'शर्त' ने रोका विकास का रास्ता?

मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की मुख्य जड़ केंद्र सरकार द्वारा रखी गई एक नई शर्त है। केंद्र चाहता है कि इन सड़क परियोजनाओं के लिए आवश्यक जमीन के अधिग्रहण का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करे। दूसरी ओर, बिहार सरकार का तर्क है कि राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए इतनी भारी भरकम राशि का भुगतान करना संभव नहीं है। पूर्व के प्रोजेक्ट्स में जमीन अधिग्रहण की लागत को साझा किया जाता था, लेकिन अब इस नए नियम ने परियोजनाओं की फाइलें एनएचएआई (NHAI) और पथ निर्माण विभाग के बीच फंसा दी हैं।

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे सहित ये प्रोजेक्ट्स हुए प्रभावित

इन 26 परियोजनाओं में सबसे महत्वपूर्ण पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे है, जिसे बिहार की कनेक्टिविटी के लिए 'गेम चेंजर' माना जा रहा था। इसके अलावा गया-हिसुआ-राजगीर-बाढ़ फोरलेन, रामनगर-कच्ची दरगाह रोड और कई महत्वपूर्ण बाईपास का काम भी रुक गया है। अगर यह गतिरोध जल्द नहीं सुलझा, तो इन प्रोजेक्ट्स की लागत (Project Cost) समय के साथ और बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर जनता की जेब और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

समाधान की कोशिशें तेज, दिल्ली में होगी बड़ी बैठक

सूत्रों का कहना है कि इस मसले को सुलझाने के लिए बिहार के वरिष्ठ अधिकारी जल्द ही दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक कर सकते हैं। राज्य सरकार चाहती है कि केंद्र 'विशेष राज्य' की स्थिति या पुराने नियमों के आधार पर जमीन अधिग्रहण में वित्तीय सहायता प्रदान करे। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या केंद्र अपनी शर्तों में ढील देगा या बिहार सरकार को विकास के लिए अपना खजाना खोलना पड़ेगा।