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April 14 2026 02:50 am

Bollywood: जब पंचम दा के निधन के बाद उनका चेहरा देखने से आशा भोंसले ने कर दिया था इनकार, गुलज़ार ने संभाला

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News India Live, Digital Desk: सुरों की मल्लिका आशा भोंसले और महान संगीतकार आरडी बर्मन (पंचम दा) की जोड़ी न केवल संगीत की दुनिया में अमर रही, बल्कि उनका निजी रिश्ता भी बेहद गहरा था। लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब आरडी बर्मन के निधन के बाद आशा भोंसले इस कदर टूट गई थीं कि उन्होंने अपने पति का पार्थिव शरीर देखने तक से इनकार कर दिया था। इस मार्मिक किस्से को याद कर आज भी प्रशंसकों की आंखें नम हो जाती हैं। उस कठिन समय में दिग्गज गीतकार गुलज़ार ने आगे आकर आशा ताई को ढांढस बंधाया था।

पंचम दा का जाना और आशा ताई का सदमा

4 जनवरी 1994 को जब आरडी बर्मन ने दुनिया को अलविदा कहा, तो पूरी फिल्म इंडस्ट्री शोक में डूब गई थी। आशा भोंसले के लिए यह किसी वज्रपात से कम नहीं था। कहा जाता है कि वह पंचम दा के निधन के बाद इस कदर सदमे में थीं कि वह उनके कमरे तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थीं। वह नहीं चाहती थीं कि उनकी आंखों में अपने साथी की वो आखिरी छवि बसे जिसमें वह बेजान लेटे हों। आशा ताई अपने मन में पंचम दा की केवल मुस्कुराती हुई और संगीत में रमी हुई यादें ही संजोकर रखना चाहती थीं।

गुलज़ार ने निभाया दोस्ती का फर्ज

आरडी बर्मन और गुलज़ार की दोस्ती जगजाहिर थी। जब गुलज़ार को पता चला कि आशा जी पंचम दा का अंतिम दीदार करने से कतरा रही हैं, तो वह उनके पास पहुंचे। गुलज़ार ने बड़े ही भावुक अंदाज में उन्हें समझाया कि यह विदाई का क्षण कठिन है, लेकिन अपनों को आखिरी बार देखना उस रिश्ते को मुकम्मल करने जैसा है। गुलज़ार की बातों ने आशा जी को संबल दिया और उन्होंने भारी मन से अपने साथी को अंतिम विदाई दी।

एक संगीत जो अधूरा रह गया

आशा भोंसले और आरडी बर्मन ने साथ मिलकर भारतीय सिनेमा को एक से बढ़कर एक सदाबहार गाने दिए। पंचम दा अक्सर आशा जी को 'ताई' कहकर बुलाते थे और उनके बीच की नोक-झोंक और प्यार ही उनके संगीत में भी झलकता था। पंचम दा के जाने के बाद आशा जी ने कई सालों तक खुद को संगीत से दूर कर लिया था, लेकिन बाद में उन्होंने गुलज़ार साहब के लिखे गीतों के जरिए ही अपनी आवाज को फिर से दुनिया तक पहुंचाया।