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March 20 2026 09:12 pm

BJP Strategy 2026 : क्या बाहरी नेताओं पर जरूरत से ज्यादा भरोसा कर रही है भाजपा? हिमंत बिस्वा का यह दांव कहीं उल्टा न पड़ जाए

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News India Live, Digital Desk : असम में 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए बिसात बिछ चुकी है। भाजपा ने अपनी पहली सूची जारी कर दी है, लेकिन इस सूची में जिस तरह से 'दलबदलुओं' को तरजीह दी गई है, उसने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं (Orginal Cadre) के बीच बेचैनी पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का यह मिशन “कांग्रेस मुक्त असम”क्या भाजपा की मूल विचारधारा और संगठन को कमजोर कर सकता है?

1. कांग्रेस के 'असेट्स' अब भाजपा के उम्मीदवार

हाल ही में कांग्रेस के बड़े नेता और सांसद प्रद्युत बोरदोलोई (Pradyut Bordoloi) और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा (Bhupen Kumar Borah) का भाजपा में शामिल होना सबसे चर्चित घटना रही है।

टिकट वितरण: भाजपा की पहली लिस्ट में प्रद्युत बोरदोलोई को दिसपुर और भूपेन बोरा को बिहपुरिया से टिकट दिया गया है।

हिमंत का तर्क: मुख्यमंत्री का कहना है कि वे कांग्रेस के उन सभी 'अच्छे लोगों' को भाजपा में लाना चाहते हैं जो राज्य के भविष्य के लिए काम करना चाहते हैं। उनके अनुसार, 2016 से शुरू हुई यह प्रक्रिया अब 99% पूरी हो चुकी है।

2. क्या यह दांव 'बैकफायर' (Backfire) कर सकता है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस रणनीति के तीन बड़े खतरे हैं:

कैडर में असंतोष: सालों से भाजपा का झंडा उठाने वाले स्थानीय नेताओं को जब 'बाहरी' नेताओं के लिए अपनी सीट छोड़नी पड़ती है, तो वे चुनाव के समय निष्क्रिय हो सकते हैं या बागी होकर निर्दलीय लड़ सकते हैं।

विचारधारा का टकराव: कांग्रेस की पृष्ठभूमि से आए नेता क्या भाजपा की मूल दक्षिणपंथी और हिंदुत्व की विचारधारा के साथ पूरी तरह तालमेल बिठा पाएंगे?

ध्रुवीकरण का डर: हिमंत बिस्वा सरमा जिस तरह से 'मिया मुस्लिम' और 'बांग्लादेशी घुसपैठ' के मुद्दों पर आक्रामक हैं, विपक्ष इसे असली मुद्दों (जैसे बेरोजगारी और महंगाई) से ध्यान भटकाने की कोशिश बता रहा है।

3. हिमंत बिस्वा सरमा: भाजपा के 'संकटमोचक' या चुनौती?

हिमंत खुद 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे और उन्होंने पार्टी को पूर्वोत्तर में अजेय बना दिया है। उनके समर्थकों का मानना है कि वे 'जीतने वाले घोड़ों' पर दांव लगाते हैं।

लक्ष्य 100+ सीटें: भाजपा गठबंधन (BJP, AGP, BPF) का लक्ष्य 2026 में 100 से ज्यादा सीटें जीतकर तीसरी बार सत्ता में आना है।

युवा कार्ड: सरकार ने 'निजत मोइना' और 'जीवन प्रेरणा' जैसी योजनाओं के जरिए 62 लाख युवा वोटर्स को साधने की कोशिश की है।

4. विपक्ष की रणनीति: 'इंडिया' ब्लॉक और ओवैसी फैक्टर

जहाँ भाजपा 'बाहरी' नेताओं को शामिल कर रही है, वहीं कांग्रेस और इंडिया (INDIA) ब्लॉक राहुल गांधी के नेतृत्व में 'मनरेगा आंदोलन' और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं। असम में असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM) की संभावित एंट्री भी त्रिकोणीय मुकाबला बना सकती है, जो सीधे तौर पर मुस्लिम वोटों का बंटवारा करेगी।