BJP Organisational Changes : जेपी नड्डा की नई टीम का ऑडिशन शुरू नितिन नबीन को मिली बड़ी जिम्मेदारी

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News India Live, Digital Desk: बीजेपी मुख्यालय में चल रही हाई-प्रोफाइल बैठकों के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी अपने सांगठनिक ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन करने जा रही है। इस फेरबदल के केंद्र में नितिन नबीन जैसे युवा और अनुभवी चेहरे हैं, जिन्हें छत्तीसगढ़ और बिहार के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है। पार्टी का मुख्य फोकस उन राज्यों पर है जहाँ 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

1. नई टीम का 'ऑडिशन': परफॉर्मेंस ही पैमाना

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि नई टीम में जगह पाने के लिए 'परफॉर्मेंस' ही एकमात्र पैमाना होगा।

युवा चेहरों को तरजीह: 50 साल से कम उम्र के प्रवक्ताओं और महासचिवों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

क्षेत्रीय संतुलन: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों से नए चेहरों को केंद्रीय पदाधिकारियों की सूची में शामिल किया जा रहा है ताकि क्षेत्रीय पकड़ मजबूत हो सके।

2. नितिन नबीन की बढ़ती ताकत: मिशन छत्तीसगढ़ का इनाम

नितिन नबीन को छत्तीसगढ़ में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने और संगठन को बूथ स्तर पर खड़ा करने का इनाम मिला है।

उन्हें राष्ट्रीय महासचिव या किसी महत्वपूर्ण राज्य का पूर्ण प्रभार दिया जा सकता है।

रणनीति: नबीन की कार्यशैली को देखते हुए उन्हें 'इलेक्शन मैनेजमेंट' की विशेष जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

3. 2026 विधानसभा चुनाव रणनीति (State-wise Strategy)

बीजेपी ने आगामी चुनावों के लिए राज्यों को तीन श्रेणियों में बांटा है:

राज्य (State)मुख्य चुनौतीबीजेपी की रणनीति
पश्चिम बंगालटीएमसी का मजबूत संगठन'बूथ जीतो, चुनाव जीतो' अभियान और नए चेहरों को मौका।
तमिलनाडुद्रविड़ राजनीति का प्रभाव'अन्नामलाई मॉडल' को और विस्तार देना और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद।
केरलएलडीएफ-यूडीएफ का दबदबाईसाई समुदाय के साथ संवाद और सामाजिक इंजीनियरिंग।

4. आरएसएस (RSS) के साथ समन्वय

इस फेरबदल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका भी अहम रहने वाली है। हाल ही में हुई समन्वय बैठकों के बाद तय हुआ है कि संगठन मंत्रियों की नियुक्ति में 'मिशन मोड' वाले कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

क्या बदला जाएगा 'महासचिवों' का पोर्टफोलियो?

सूत्रों का दावा है कि वर्तमान में कार्यरत कई महासचिवों को हटाकर उन्हें चुनावी राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष या अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाओं में भेजा जा सकता है। इसका उद्देश्य संगठन में नई ऊर्जा भरना है ताकि सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को मात दी जा सके।

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