Bihar University : चूहों का आतंक होगा खत्म BRABU के प्रोफेसर ने बनाई जादुई मशीन, UK में मिला पेटेंट

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News India Live, Digital Desk : अब घरों और गोदामों में रखा अनाज चूहों की भेंट नहीं चढ़ेगा। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी (BRABU) के पूर्व विज्ञान संकाय अध्यक्ष प्रो. मनेंद्र कुमार ने चूहों को भगाने के लिए एक क्रांतिकारी यंत्र तैयार किया है। इस नवाचार की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस डिवाइस को यूनाइटेड किंगडम (UK) में पेटेंट प्राप्त हुआ है।

इस अत्याधुनिक मशीन का नाम 'अल्ट्रासोनिक एण्ड सेंट बेस्ड रॉडेंट डिटेरेन्ट डिवाइस' (Ultrasonic and Scent Based Rodent Deterrent Device) रखा गया है।

क्यों पड़ी इस यंत्र की जरूरत?

प्रो. मनेंद्र कुमार के अनुसार, चूहे न केवल खेतों और गोदामों में आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि वे प्लेग, लेप्टोस्पाइरोसिस और लासा फीवर जैसी घातक बीमारियां भी फैलाते हैं। चूहों को मारने के पारंपरिक तरीके जैसे जहर या पिंजरे, बच्चों और पालतू जानवरों के लिए खतरनाक होते हैं। इन्ही चुनौतियों को देखते हुए यह गैर-विषैला (Non-toxic) समाधान तैयार किया गया है।

कैसे काम करती है यह मशीन? (Dual Action Technology)

यह डिवाइस दोहरी तकनीक पर आधारित है, जो चूहों को बिना मारे उस स्थान को छोड़ने पर मजबूर कर देती है:

अल्ट्रासोनिक तरंगे (20-60 kHz): यह मशीन ऐसी ध्वनि तरंगे पैदा करती है जो इंसानों को सुनाई नहीं देतीं, लेकिन चूहों के लिए असहनीय होती हैं। इसकी आवृत्ति (Frequency) बदलती रहती है, जिससे चूहे इस आवाज के अभ्यस्त नहीं हो पाते।

प्राकृतिक सुगंध (Scent Cartridge): मशीन में पेपरमिंट और सिट्रोनेला जैसे प्राकृतिक तेलों का उपयोग किया गया है। मोशन सेंसर जैसे ही चूहे की आहट पहचानता है, यह मशीन एक खास गंध छोड़ती है जो चूहों की घ्राण शक्ति पर दबाव बनाती है।

मशीन की मुख्य विशेषताएं:

मोशन सेंसर: इसमें 'पैसिम इन्फ्रारेड मोशन सेंसर' लगा है, जो चूहों की गतिविधि होते ही सक्रिय हो जाता है।

पर्यावरण के अनुकूल: यह पूरी तरह से सुरक्षित है और इसमें किसी हानिकारक रसायन का प्रयोग नहीं हुआ है।

सोलर विकल्प: यह लो-पावर ऑपरेशन पर काम करती है और इसे बैटरी या सोलर पैनल से भी चलाया जा सकता है।

लंबे समय तक असरदार: यह चूहों को मारने के बजाय उन्हें उस जगह से स्थायी रूप से दूर रखने का दीर्घकालिक समाधान देती है।

टीम का योगदान

इस विशेष उपकरण के डिजाइन और शोध में प्रो. मनेंद्र कुमार के साथ शोधार्थी स्वाती सुमन और सोनम कुमारी ने मुख्य भूमिका निभाई। इसके अलावा, जंतु विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ब्रजकिशोर प्रसाद सिंह का भी इसमें सराहनीय सहयोग रहा।