Land For Job Scam : लालू परिवार पर चलेगा मुकदमा, 9 मार्च से शुरू होगा ट्रायल, कोर्ट ने दी व्यक्तिगत पेशी से राहत

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News India Live, Digital Desk : देश के बहुचर्चित 'जमीन के बदले नौकरी' (Land For Job) घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले में ऐतिहासिक आदेश सुनाते हुए ट्रायल (मुकदमे) की तारीख तय कर दी है।

अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस कथित घोटाले में 9 मार्च 2026 से नियमित मुकदमा शुरू होगा। हालांकि, लालू परिवार के लिए एक छोटी राहत यह रही कि अदालत ने उन्हें व्यक्तिगत पेशी से फिलहाल छूट दे दी है।

कोर्ट की कार्यवाही: वीसी के जरिए पेश हुए लालू-तेजस्वी

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों से लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए अदालत के सामने पेश हुए। वहीं, मीसा भारती और हेमा यादव व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में मौजूद रहीं।

ट्रायल की शुरुआत: 9 मार्च से अदालत गवाहों के बयान दर्ज करना और सीबीआई (CBI) द्वारा जुटाए गए सबूतों की जांच शुरू करेगी।

व्यक्तिगत पेशी से राहत: लालू यादव ने अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कोर्ट से छूट मांगी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। तेजस्वी और राबड़ी देवी को भी अब हर सुनवाई पर कोर्ट में मौजूद रहने की जरूरत नहीं होगी।

"रेलवे को निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया"  कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने इस मामले में आरोप तय करते समय लालू यादव के कार्यकाल पर बेहद कड़ी टिप्पणी की थी। उन्होंने अपने आदेश में कहा:पूर्व रेल मंत्री ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया। यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी नौकरियों को जमीन हड़पने के लिए एक 'सौदेबाजी के हथियार' के रूप में इस्तेमाल किया।"

अदालत ने लालू परिवार द्वारा दी गई बरी करने की याचिका को 'अनुचित' बताते हुए खारिज कर दिया और इसे एक संगठित आपराधिक समूह की साजिश करार दिया।

क्या है पूरा लैंड फॉर जॉब घोटाला?

यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे।

आरोप: भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन (जबलपुर) में ग्रुप-डी पदों पर भर्तियां की गईं।

तरीका: नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों ने कथित तौर पर लालू परिवार के सदस्यों या उनके करीबियों के नाम पर जमीन 'गिफ्ट' की या बहुत कम दाम पर बेची।

नियमों का उल्लंघन: सीबीआई का दावा है कि इन नियुक्तियों के लिए कोई सार्वजनिक नोटिस या विज्ञापन जारी नहीं किया गया था और पूरी प्रक्रिया नियमों को ताक पर रखकर की गई थी।

अब आगे क्या?

9 मार्च से शुरू होने वाला ट्रायल लालू परिवार के राजनीतिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। जहां सीबीआई भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के सबूत पेश करेगी, वहीं लालू परिवार का दावा है कि यह पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और उन्हें फंसाया जा रहा है।