Bihar Road Projects : बिहार सरकार को केंद्र का नोटिस नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स की सुस्त रफ्तार पर गडकरी सख्त

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News India Live, Digital Desk: बिहार में सड़कों का जाल बिछाने के दावों के बीच कई बड़ी परियोजनाएं फाइलों और जमीन अधिग्रहण की बाधाओं में फंसी हुई हैं। इसे लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बिहार के पथ निर्माण विभाग को पत्र लिखकर उन सभी नेशनल हाईवे परियोजनाओं की सूची मांगी है, जिनका काम अब तक शुरू नहीं हो सका है।

1. 100 करोड़ से ऊपर के प्रोजेक्ट्स पर 'सीधी नजर'

केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वह बिहार के बड़े प्रोजेक्ट्स की निगरानी खुद करेगी:

नया नियम: अब ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाली सभी सड़क परियोजनाओं की नियमित और कड़ी निगरानी सीधे केंद्र सरकार के स्तर पर की जाएगी।

समीक्षा बैठक: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी 16 और 17 फरवरी 2026 को दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। इसमें NHAI, मंत्रालय और बिहार सरकार के एनएच डिवीजन के अधिकारी शामिल होंगे।

2. रडार पर ये प्रमुख परियोजनाएं (Projects Under Scanner)

समीक्षा बैठक में उन प्रोजेक्ट्स पर विशेष जोर दिया जाएगा जहाँ वित्तीय वर्ष 2025-26 में काम शुरू होना था लेकिन लटका हुआ है:

प्रमुख प्रोजेक्टवर्तमान स्थिति
वाराणसी-रांची-कोलकाता हाईवेजमीन अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लीयरेंस में देरी।
पटना-आरा-सासाराम फोरलेननिर्माण कार्य की सुस्त रफ्तार।
समस्तीपुर-दरभंगा आरओबीतकनीकी अड़चनों के कारण काम ठप।
बख्तियारपुर-रजौली पैकेज-1कॉन्ट्रैक्टर और प्रशासनिक बाधाएं।
आरा बाईपास और मुसरीघरारी आरओबीस्थानीय विवादों के कारण लंबित।

3. देरी की मुख्य वजहें और सरकार की सख्ती

केंद्र सरकार ने उन 'अड़चनों' की पहचान की है जो बिहार में सड़क निर्माण की राह रोक रही हैं:

जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition): कई जिलों में जमीन के मुआवजे और कब्जे को लेकर पेंच फंसा है।

फॉरेस्ट और वाइल्डलाइफ क्लीयरेंस: पर्यावरण संबंधी मंजूरियों में देरी।

प्रशासनिक सुस्ती: राज्य स्तर पर समन्वय की कमी।

4. बैठक के संभावित नतीजे

सूत्रों का कहना है कि 16-17 फरवरी की बैठक में गडकरी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर सकते हैं:

डेडलाइन तय होगी: प्रत्येक लंबित प्रोजेक्ट के लिए नई और सख्त डेडलाइन दी जाएगी।

फंडिंग पर चर्चा: अटके हुए प्रोजेक्ट्स के लिए अतिरिक्त बजट और वित्तीय वर्ष 2025-26 की नई योजनाओं की अद्यतन स्थिति जांची जाएगी।

कठोर निर्देश: काम शुरू न करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई और राज्य सरकार को प्रक्रिया तेज करने के कड़े निर्देश दिए जा सकते हैं।

 क्या बदलेगी बिहार की सूरत?

बिहार में एक्सप्रेसवे और छह-लेन सड़कों (जैसे वाराणसी-औरंगाबाद) का सपना तभी पूरा होगा जब जमीन पर काम दिखेगा। केंद्र की इस सख्ती से उम्मीद जगी है कि चुनावी साल से पहले बिहार की जनता को अधूरी सड़कों से मुक्ति मिलेगी

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