Bihar Politics : पहला चुनाव, सीधे मंत्री का पद, कौन हैं संजय सिंह टाइगर जिन्हें नीतीश कुमार ने सीधे कैबिनेट में ले लिया?

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News India Live, Digital Desk : बिहार की राजनीति में आजकल खूब उठापटक चल रही है, लेकिन इसी उठापटक में कुछ ऐसे फैसले भी हो रहे हैं जो लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। इनमें से एक फैसला है संजय सिंह 'टाइगर' (Sanjay Singh Tiger) को नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में जगह मिलना।

यह फैसला इसलिए चर्चा में है क्योंकि संजय सिंह टाइगर अभी पहली बार विधायक (First Time MLA) बनकर आए हैं। आमतौर पर मंत्री बनने के लिए नेता सालों तक इंतज़ार करते हैं, संगठन में अपनी उपयोगिता साबित करते हैं। लेकिन संजय सिंह टाइगर के साथ ऐसा नहीं हुआ। विधायक बनते ही उन्हें सीधे मंत्री पद मिल गया।

कौन हैं संजय सिंह टाइगर?

संजय सिंह टाइगर ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें आज ही किसी ने देखा हो। वो जेडीयू (JDU) संगठन के बहुत पुराने और ज़मीन से जुड़े सिपाही रहे हैं। भले ही वो पहली बार विधायक बनकर विधानसभा पहुँचे हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पारी पुरानी है।

  • संगठन की जान: वो पार्टी में महामंत्री से लेकर मुख्य प्रवक्ता (Chief Spokesperson) जैसे कई अहम पदों पर रहे हैं। ये वह पोस्ट होती है, जहाँ आपको सरकार की बात लोगों तक पहुंचानी होती है।
  • निर्णायक सीट से जीत: उन्हें टिकट मिलना और उनका जीतना जेडीयू के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा।

कैबिनेट में उन्हें क्यों लिया गया? (Why Tiger is in Cabinet?)

नीतीश कुमार का ये फैसला सिर्फ एक नेता को इनाम देना नहीं है, बल्कि एक बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है:

  1. वफादारी का ईनाम: टाइगर लंबे समय से जेडीयू के लिए वफादार रहे हैं और मुश्किल वक्त में भी पार्टी का चेहरा रहे। ऐसे नेताओं को कैबिनेट में लेना एक पॉजिटिव मैसेज देता है।
  2. राजपूत समुदाय का समीकरण: बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरण बहुत अहम हैं। संजय सिंह टाइगर राजपूत (Rajput) समुदाय से आते हैं। उन्हें कैबिनेट में शामिल करके जेडीयू ने इस महत्वपूर्ण वोट बैंक को बड़ा संदेश दिया है।
  3. संगठन में मजबूती: जो नेता संगठन में काम करते हैं, उन्हें यह सम्मान मिलने से पार्टी के बाकी जमीनी कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा आ जाती है।

तो यह मत सोचिये कि संजय सिंह टाइगर एक रात में चमक गए हैं। उनकी मेहनत, वफादारी और जातीय समीकरणों की अहमियत ही उन्हें सीधे विधानसभा से मंत्री की कुर्सी तक ले आई है।