Bihar : अब नौकरी के लिए नहीं जाना पड़ेगा बेंगलुरु ,सीएम नीतीश ने किया मेगा टेक सिटी का ऐलान

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News India Live, Digital Desk : हम बिहारियों की एक पुरानी टीस रही है पढ़ाई यहाँ करते हैं, लेकिन नौकरी के लिए बैंगलोर, पुणे या दिल्ली भागना पड़ता है।" दूसरी टीस हमारे किसान भाइयों की है, जो बरसों से बंद पड़ी चीनी मिलों (Sugar Mills) की चिमनियों से धुआं निकलने का इंतज़ार कर रहे हैं। लेकिन, लगता है कि अब यह इंतजार खत्म होने वाला है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने राज्य की अर्थव्यस्था और रोजगार को लेकर कुछ ऐसे एलान किए हैं, जिन्होंने युवाओं और किसानों दोनों के चेहरों पर चमक ला दी है।

आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि सीएम की इस घोषणा के मायने क्या हैं और आपकी जिंदगी पर इसका क्या असर पड़ेगा।

1. बिहार की अपनी 'मेगा टेक सिटी' (Mega Tech City)

आईटी (IT) सेक्टर में काम करने वाले बिहारी युवाओं के लिए यह सबसे बड़ी खबर है। सीएम नीतीश कुमार ने ऐलान किया है कि बिहार में एक "मेगा टेक सिटी" बसाई जाएगी।
इसका क्या मतलब है?
जैसे आप बैंगलोर की इलेक्ट्रॉनिक सिटी या हैदराबाद की हाईटेक सिटी देखते हैं, कुछ वैसा ही अब बिहार में भी बनेगा। यहाँ बड़ी-बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियां अपने ऑफिस खोल सकेंगी।

  • फायदा: जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और टेक्निकल लोग घर छोड़कर बाहर नौकरी कर रहे हैं, उन्हें अपने ही राज्य में, अपने परिवार के पास रहकर काम करने का मौका मिलेगा। यह 'ब्रेन ड्रेन' रोकने का सबसे कारगर उपाय है।

2. चीनी मिलों के खुलेंगे ताले (Revival of Sugar Mills)

बिहार का गौरव कभी यहाँ की चीनी मिलें हुआ करती थीं, जो समय के साथ बंद हो गईं। यह एक बहुत ही भावुक मुद्दा रहा है। सीएम ने साफ़ कहा है कि बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू करने के लिए सरकार गंभीर है।

  • किसानों को लाभ: अगर आपके क्षेत्र की चीनी मिल चालू होती है, तो गन्ना किसानों को उनकी फसल का सही दाम तुरंत मिलेगा और उन्हें बिचौलियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही, इथेनॉल उत्पादन (Ethanol Production) से भी किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

3. नई इंडस्ट्रीज का जाल

सरकार सिर्फ एक क्षेत्र पर नहीं रुकी है। नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य के अलग-अलग जिलों में स्थानीय जरूरतों के हिसाब से नई इंडस्ट्रीज (Industries) लगाई जाएंगी।
मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और पटना के आसपास के इलाकों में औद्योगिक क्लस्टर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार उद्यमियों (Businessmen) को जमीन और बिजली में रियायत दे रही है ताकि वे बिहार आएं और फैक्ट्रियां लगाएं।

क्या सच में बदलेगी तस्वीर?

आलोचक कह सकते हैं कि ये सिर्फ वादे हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में इथेनॉल पॉलिसी और टेक्सटाइल पॉलिसी में बिहार ने जो काम किया है, उसे नकारा नहीं जा सकता। 'मेगा टेक सिटी' और 'चीनी मिलों' का दोबारा शुरू होना अगर हकीकत बनता है, तो बिहार को विकसित राज्य बनने से कोई नहीं रोक सकता।

युवाओं के लिए यह एक संकेत है अपने स्किल पर काम करें, क्योंकि आने वाले समय में आपके अपने घर (बिहार) में ही अवसरों की बाढ़ आने वाली है!