Bihar NDA Victory : खुद को हीरो मत समझो,अमित शाह ने बिहार BJP नेताओं को दी ऐसी नसीहत, सन्न रह गए सब
News India Live, Digital Desk: Bihar NDA Victory : बिहार में NDA की शानदार जीत हुई है। ढोल-नगाड़े बज रहे हैं और लड्डू बंट रहे हैं। जाहिर है, जीत की खुशी में हर नेता का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। अक्सर देखा जाता है कि चुनाव जीतते ही नेता जी को लगने लगता है कि "भाई, यह सब तो मेरे ही कारण हुआ है।" लेकिन, राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह (Amit Shah) ने जीत के जश्न के बीच अपनी ही पार्टी के नेताओं को एक बहुत बड़ा 'रियलिटी चेक' दिया है।
"पांव जमीन पर रखो..."
अमित शाह ने बिहार भाजपा के बड़े नेताओं को साफ लफ्जों में समझा दिया है कि हवा में उड़ने की जरूरत नहीं है। उन्होंने एक बैठक में बहुत पते की बात कही। उन्होंने कहा, "इस जीत का श्रेय खुद को देने की गलती मत करना।"
सुनने में यह थोड़ा कड़वा लग सकता है, लेकिन शाह ने इसके पीछे एक गहरा तर्क दिया। उनका कहना है कि जब कोई नेता यह मान लेता है कि "मैंने चुनाव जितवाया है", तो उसके अंदर अनजाने में ही 'अहंकार' (Arrogance) घर कर जाता है। और राजनीति में अहंकार वो दीमक है जो बड़े-बड़े दिग्गजों की कुर्सियां खा जाता है।
तो जीत किसकी है?
अमित शाह ने नेताओं को याद दिलाया कि बिहार में जो सफलता मिली है, वो किसी एक व्यक्ति का जादू नहीं है। यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, एनडीए (NDA) की एकजुटता और जमीन पर काम करने वाले लाखों कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है।
जब नेता सारा क्रेडिट खुद लेने की कोशिश करता है, तो वह उन कार्यकर्ताओं की मेहनत को नजरअंदाज कर देता है जिन्होंने धूप-पसीने में बूथ पर काम किया। शाह का संदेश साफ़ था—यह जीत 'मैं' की नहीं, 'हम' की है।
अहंकार: राजनीति का सबसे बड़ा दुश्मन
हमने कई बार देखा है कि बंपर जीत के बाद नेता जनता और कार्यकर्ताओं से दूर हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि वो तो अजेय हैं। अमित शाह इसी "पोस्ट-विक्ट्री सिंड्रोम" (Post-victory syndrome) का इलाज पहले ही कर देना चाहते हैं। वो चाहते हैं कि भाजपा के नेता विनम्र बने रहें, क्योंकि असली परीक्षा चुनाव जीतने के बाद, सरकार चलाने में होती है।
आगे की राह
अमित शाह की यह सलाह उन नेताओं के लिए एक सबक है जो टिकट मिलने या जीतने के बाद खुद को 'सुप्रीमो' समझने लगते हैं। भाजपा 2029 या भविष्य के चुनावों के लिए अभी से अपनी टीम को अनुशासित रखना चाहती है।
कुल मिलाकर बात यह है कि "श्रेय लेने की होड़" छोड़कर अब "जिम्मेदारी उठाने" का वक्त है। अब देखना यह होगा कि बिहार भाजपा के नेता अमित शाह के इस गुरु-मंत्र को कितना याद रखते हैं।