Bihar Mahila Rojgar Diwas : 8 मार्च को बिहार में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस नहीं, अब मनेगा महिला रोजगार दिवस नीतीश सरकार का बड़ा फैसला
News India Live, Digital Desk: बिहार में महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए नीतीश सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। इस साल 8 मार्च 2026 को बिहार में 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' के बजाय 'महिला रोजगार दिवस' (Mahila Rojgar Diwas) के रूप में मनाया जाएगा। इस विशेष दिन का मुख्य उद्देश्य राज्य की महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसरों से जोड़ना और सरकारी योजनाओं की जानकारी उन तक पहुँचाना है।
1. क्यों लिया गया यह फैसला? (The Objective)
बिहार सरकार का मानना है कि केवल सम्मान देने से महिला सशक्तिकरण अधूरा है, जब तक उनके पास ठोस आर्थिक आधार न हो।
आर्थिक आजादी: 'महिला रोजगार दिवस' के जरिए सरकार महिलाओं को स्वावलंबी बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
जागरूकता अभियान: इस दिन पूरे राज्य में विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ स्वरोजगार (Self-employment) और लघु उद्योगों के लिए ऋण (Loan) सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी।
2. जिला स्तर पर लगेंगे 'महिला रोजगार मेले' (Employment Fairs)
इस पहल के तहत बिहार के सभी 38 जिलों में भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा:
ऑन-द-स्पॉट चयन: कई निजी कंपनियां और स्टार्ट-अप्स इन मेलों में हिस्सा लेंगी, जो योग्य महिला उम्मीदवारों को नौकरी के ऑफर देंगी।
स्किल डेवलपमेंट: महिलाओं को हुनरमंद बनाने के लिए कौशल विकास केंद्रों (Skill Development Centers) के माध्यम से नए कोर्स और ट्रेनिंग प्रोग्राम लॉन्च किए जाएंगे।
3. 'जीविका' दीदियों की भूमिका होगी अहम (Role of Jeevika)
बिहार की प्रसिद्ध 'जीविका' (Bihar Rural Livelihoods Project) समूह की महिलाओं को इस अभियान का मुख्य स्तंभ बनाया गया है।
सफलता की कहानियां: रोजगार दिवस के मौके पर उन महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने जीविका के माध्यम से खुद का व्यवसाय खड़ा किया है।
नेटवर्किंग: नए समूहों को पुरानी अनुभवी दीदियों से प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिलाने की व्यवस्था की जाएगी।
4. सरकारी नौकरियों में आरक्षण और नई घोषणाएं
बिहार पहले से ही सरकारी नौकरियों (विशेषकर पुलिस और शिक्षण) में महिलाओं को 35% आरक्षण दे रहा है।
नई योजनाएं: सूत्रों के अनुसार, 8 मार्च को मुख्यमंत्री महिलाओं के लिए कुछ नई वित्तीय सहायता योजनाओं (जैसे मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना में विस्तार) की घोषणा कर सकते हैं।
डिजिटल साक्षरता: ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को डिजिटल रूप से साक्षर बनाने के लिए 'स्मार्ट सखी' जैसे कार्यक्रमों पर जोर दिया जाएगा।
5. समाज पर व्यापक असर की उम्मीद
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह 'साइलेंट वोटर' (महिलाएं) कार्ड 2025-26 के चुनावी समीकरणों में गेम-चेंजर साबित हो सकता है। महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़कर सरकार एक मजबूत संदेश देना चाहती है।