Bihar Elections 2025 : ओवैसी का खतरनाक प्लान, 100 सीटों पर उतारेंगे उम्मीदवार, तेजस्वी-राहुल का खेल होगा खत्म
News India Live, Digital Desk: Bihar Elections 2025 : बिहार की सियासी सरगर्मी तेज होती जा रही है और आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक समीकरणों को साधने की होड़ मची हुई है. इसी बीच, असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने बिहार में लगभग 100 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर, राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है. AIMIM का यह कदम तेजस्वी यादव के राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और राहुल गांधी के नेतृत्व वाले 'INDIA गठबंधन' के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, खासकर उन सीटों पर जहाँ मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं.
AIMIM का चुनावी प्लान और इसका असर:
AIMIM बिहार में सीमांचल और कुछ अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. उनके 100 सीटों पर लड़ने के फैसले के कई निहितार्थ हो सकते हैं:
- INDIA गठबंधन के वोटों में सेंध:
- AIMIM का मुख्य वोट बैंक मुस्लिम समुदाय रहा है. पारंपरिक रूप से, मुस्लिम वोट आरजेडी और कांग्रेस जैसे दलों (जो INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं) के पाले में जाते रहे हैं.
- ओवैसी की पार्टी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाएगी, जिससे RJD और कांग्रेस उम्मीदवारों के जीतने की संभावना कम हो सकती है. यह वोटों का सीधा विभाजन (Vote Split) करेगा, जिसका फायदा BJP या NDA को मिल सकता है.
- तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन के लिए यह एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि उन्हें अपनी जीत के लिए मुस्लिम वोटर्स का भरपूर समर्थन चाहिए.
- BJP को परोक्ष लाभ (Implicit Benefit for BJP):
- भले ही AIMIM, BJP के खिलाफ चुनाव लड़ती है, लेकिन मुस्लिम वोटों के विभाजन से परोक्ष रूप से BJP को लाभ मिल सकता है. खासकर त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबले में, कम वोटों के अंतर से BJP के उम्मीदवार जीत सकते हैं.
- सीमांचल पर खास फोकस: AIMIM का सीमांचल क्षेत्र में पहले से ही प्रभाव है. किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, अररिया जैसे जिलों में उनकी उपस्थिति बड़ी है, और वे इन इलाकों में अपने उम्मीदवारों को मजबूती से उतारेंगे.
- दलित और पिछड़े वर्ग के बीच पहुँच: ओवैसी की पार्टी केवल मुस्लिमों पर ही नहीं, बल्कि दलितों और अति पिछड़े वर्गों के बीच भी अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है, जो बिहार की जातीय राजनीति में एक अहम रोल अदा करते हैं.
AIMIM की इस चुनावी रणनीति से बिहार की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है. यह देखना दिलचस्प होगा कि RJD और कांग्रेस, ओवैसी के इस मास्टरस्ट्रोक से निपटने के लिए क्या जवाबी रणनीति अपनाते हैं. बिहार चुनाव 2025 का यह रण AIMIM के दखल से और भी पेचीदा और रोमांचक हो गया है