झारखंड बोर्ड के छात्रों के लिए बड़ी खबर अब OMR शीट पर नहीं होंगे एग्जाम, बदला जा रहा है पूरा पैटर्न

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News India Live, Digital Desk : अगर आप या आपके घर का कोई बच्चा झारखंड बोर्ड (JAC) के तहत 8वीं, 9वीं या 11वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। पिछले कुछ सालों से हम देख रहे थे कि इन कक्षाओं की परीक्षाएं सिर्फ OMR शीट (ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन) पर होती थीं। बस प्रश्न पढ़ो, सही गोले को काला करो और एग्जाम ख़त्म!

लेकिन अब यह सिस्टम बदलने वाला है। शिक्षा विभाग को लगा है कि इस "गोला भरने" (Tick mark) के चक्कर में बच्चे लिखना-पढ़ना भूलते जा रहे हैं। इसलिए, एक बहुत बड़ा फैसला लिया जा रहा है OMR को हटाकर वापस उत्तर-पुस्तिका (Answer Sheet) पर परीक्षा लेने का।

आइए, बिल्कुल सरल भाषा में समझते हैं कि यह कब से लागू होगा और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा।

क्यों किया जा रहा है यह बदलाव?

अक्सर देखा गया है कि 8वीं, 9वीं और 11वीं में सिर्फ ऑब्जेक्टिव (Objective) सवाल हल करने के कारण बच्चों की लिखने की क्षमता (Writing Skill) बहुत कमजोर हो गई है। जब ये बच्चे 10वीं या 12वीं में जाते हैं, जहाँ बड़े-बड़े उत्तर लिखने होते हैं, तो उनके हाथ कांपने लगते हैं या वे सही से जवाब नहीं लिख पाते।

इसी समस्या को दूर करने के लिए जेसीईआरटी (JCERT) ने प्रस्ताव तैयार किया है। मकसद साफ़ है बच्चों की नींव मजबूत करना और उन्हें रट्टा मारने या तुक्का लगाने की जगह समझकर लिखना सिखाना।

कब से हटेगी OMR शीट? (Exam Pattern Roadmap)

यह बदलाव एक ही रात में नहीं होगा, इसे धीरे-धीरे (Phase wise) लागू किया जाएगा ताकि बच्चों पर अचानक बोझ न पड़े। जेसीईआरटी के मसौदे के अनुसार:

  1. कक्षा 9वीं और 11वीं:
    इन कक्षाओं के लिए टारगेट वर्ष 2027 रखा गया है। यानी, जो सत्र (Session) 2026-27 होगा, उसमें OMR शीट पर परीक्षा पूरी तरह बंद हो सकती है और पूरी परीक्षा प्रश्न-सह-उत्तर पुस्तिका (लिखित) पर होगी। इससे पहले के सालों में शायद ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव का मिक्स देखने को मिल सकता है।
  2. कक्षा 8वीं:
    इन छोटे बच्चों के लिए यह बदलाव वर्ष 2028 (सत्र 2027-28) से लागू करने की योजना है। तब तक उन्हें धीरे-धीरे लिखने की आदत डाली जाएगी।

इससे क्या फायदा होगा?

अभी तक क्या होता था कि 8वीं, 9वीं और 11वीं में बच्चे सिर्फ चार ऑप्शन में से एक चुनकर पास हो जाते थे। कई बार जय माता दी बोलकर तुक्का भी लग जाता था। लेकिन जब भविष्य में वे कॉम्पिटिशन एग्जाम या बोर्ड एग्जाम में बैठते थे, तो कॉन्सेप्ट क्लियर न होने की वजह से फेल हो जाते थे।

लिखित परीक्षा वापस आने से:

  • बच्चों की हैंडराइटिंग सुधरेगी।
  • विषय की गहरी समझ (Deep Knowledge) बढ़ेगी।
  • मैट्रिक और इंटरमीडिएट में रिजल्ट बेहतर होगा।

छात्रों के लिए सलाह

तो बच्चों, अगर आप सोच रहे थे कि बस परीक्षा से एक महीना पहले "गैस पेपर" पढ़कर और गोला भरकर पास हो जाएंगे, तो अब वह दिन जाने वाले हैं। अपनी किताबों से धूल हटाइये और लिखने की प्रैक्टिस शुरू कर दीजिये। यह फैसला भले ही कड़वा लगे, लेकिन आपके सुनहरे भविष्य के लिए यह एक 'जरूरी दवा' जैसा है।

अभी प्रस्ताव शिक्षा विभाग के सचिव को भेजा गया है, जल्द ही इस पर अंतिम मुहर लग जाएगी।