MBBS के नतीजों में बड़ा खेल बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में 65% फेल छात्र री-चेकिंग में हुए पास, उठ रहे गंभीर सवाल
News India Live, Digital Desk: पंजाब की बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) में एमबीबीएस (MBBS) की परीक्षाओं के परिणामों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में घोषित हुए प्रथम वर्ष के नतीजों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि री-चेकिंग (Re-checking) के लिए आवेदन करने वाले फेल छात्रों में से 65 प्रतिशत छात्र पास हो गए हैं। इस घटना ने यूनिवर्सिटी की मूल्यांकन प्रक्रिया और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
फेल से पास होने का 'जादुई' सफर: आंकड़ों ने सबको चौंकाया
यूनिवर्सिटी द्वारा जारी शुरुआती नतीजों में बड़ी संख्या में छात्र एक या दो विषयों में फेल घोषित किए गए थे। जब इन छात्रों ने असंतुष्ट होकर री-चेकिंग के लिए आवेदन किया, तो संशोधित परिणामों ने सबको हैरान कर दिया।
कुल आवेदन: सैकड़ों छात्रों ने अपने अंकों की दोबारा जांच के लिए फॉर्म भरा था।
सफलता की दर: री-चेकिंग के बाद लगभग 65% छात्र सफल घोषित किए गए।
अंकों में उछाल: कई छात्रों के अंकों में 10 से 15 नंबर तक की बढ़ोतरी देखी गई, जो सामान्य तौर पर री-चेकिंग (जिसमें सिर्फ अंकों का जोड़ देखा जाता है) में दुर्लभ माना जाता है।
छात्रों और अभिभावकों का फूटा गुस्सा, धांधली के आरोप
परिणामों में आए इस भारी अंतर के बाद छात्रों और उनके अभिभावकों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। छात्रों का आरोप है कि पहली बार में कॉपियों का मूल्यांकन ठीक से नहीं किया गया या जानबूझकर छात्रों को फेल किया गया ताकि री-चेकिंग की फीस के जरिए फंड जुटाया जा सके। कुछ अभिभावकों ने इसे एक बड़ा 'मार्क्स स्कैम' करार दिया है और मांग की है कि पूरे रिजल्ट की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
यूनिवर्सिटी प्रशासन की सफाई: 'मानवीय चूक' का दिया हवाला
विवाद बढ़ता देख बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने इस पर सफाई दी है। प्रशासन का कहना है कि यह एक 'क्लेरिकल मिस्टेक' या मानवीय चूक हो सकती है। यूनिवर्सिटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "री-चेकिंग के दौरान कुछ कॉपियों में अंकों के जोड़ (Totaling) में गलती पाई गई थी, जिसे सुधार लिया गया है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी योग्य छात्र के साथ अन्याय न हो।" हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में सुधार होना प्रशासन की दलीलों को कमजोर कर रहा है।
भविष्य के डॉक्टरों की साख पर संकट?
मेडिकल शिक्षा में इस तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एमबीबीएस जैसे संवेदनशील कोर्स की परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं रहेगी, तो यह आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। पंजाब सरकार और मेडिकल काउंसिल से भी इस मामले में दखल देने की मांग की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां न दोहराई जाएं।