Rajasthan : खेरवाड़ा को बड़ी सौगात 363.89 करोड़ की लागत से बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर, जाम से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति
News India Live, Digital Desk: राजस्थान के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (NH-48) के उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी सेक्शन पर स्थित खेरवाड़ा कस्बे में एक नए एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल ₹363.89 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इस कॉरिडोर के बनने से न केवल खेरवाड़ा शहर में लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, बल्कि राजस्थान और गुजरात के बीच का सफर भी और अधिक सुगम हो जाएगा।
ट्रैफिक जाम की समस्या का होगा स्थायी समाधान
खेरवाड़ा शहर NH-48 पर स्थित एक प्रमुख व्यापारिक और आवाजाही वाला केंद्र है। वर्तमान में, भारी वाहनों और स्थानीय यातायात के एक ही सड़क पर होने के कारण यहां अक्सर लंबा जाम लगा रहता है, जिससे यात्रियों और स्थानीय निवासियों को काफी परेशानी होती है।
समय की बचत: एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद, थ्रू-ट्रैफिक (सीधे जाने वाले वाहन) शहर के ऊपर से निकल जाएंगे, जिससे शहर के भीतर का दबाव कम होगा और यात्रा समय में भारी बचत होगी।
दुर्घटनाओं में कमी: शहर के मुख्य बाजारों और चौराहों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की संभावना भी इस बाईपास नुमा कॉरिडोर के कारण न्यूनतम हो जाएगी।
इकोनॉमी और कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट
यह प्रोजेक्ट केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा।
बेहतर लॉजिस्टिक्स: NH-48 भारत के सबसे व्यस्त राजमार्गों में से एक है जो दिल्ली को मुंबई से जोड़ता है। इस कॉरिडोर से माल ढुलाई करने वाले ट्रकों की आवाजाही तेज होगी।
रोजगार के अवसर: निर्माण कार्य के दौरान और उसके बाद स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
स्थानीय व्यापार को लाभ: शहर के भीतर जाम कम होने से स्थानीय ग्राहकों को बाजार आने-जाने में आसानी होगी, जिससे स्थानीय व्यापारियों का कारोबार बढ़ेगा।
प्रोजेक्ट की खास बातें और वर्तमान स्थिति
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को EPC (Engineering, Procurement, and Construction) मोड पर तैयार किया जा रहा है। इसका मतलब है कि डिजाइन से लेकर निर्माण तक की पूरी जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था की होगी।
बजट: ₹363.89 करोड़ की राशि में निर्माण, भूमि अधिग्रहण (यदि आवश्यक हो) और अन्य तकनीकी कार्य शामिल हैं।
अगला कदम: टेंडर प्रक्रिया के अंतिम चरण के बाद निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। प्रशासन का लक्ष्य है कि तय समय सीमा के भीतर इस कॉरिडोर को जनता के लिए समर्पित कर दिया जाए।