लीबिया में बड़ा तख्तापलट तानाशाह गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की हत्या? जानें क्या है इस वायरल खबर का सच

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News India Live, Digital Desk : लीबिया के पूर्व शासक मुअम्मर गद्दाफी के परिवार से जुड़ी एक ऐसी खबर आ रही है जिसने मध्य पूर्व की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सोशल मीडिया और कई अंतरराष्ट्रीय हलकों में यह दावा किया जा रहा है कि गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी (Saif al-Islam Gaddafi) की लीबिया में हत्या कर दी गई है। सालों तक गुप्त रहने और फिर राजनीति में वापसी की कोशिशों के बीच इस खबर ने गद्दाफी समर्थकों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

कैसे हुई मौत? दावों और हकीकत के बीच उलझी गुत्थी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लीबिया के आंतरिक संघर्ष और गुटीय जंग के बीच सैफ अल-इस्लाम को निशाना बनाया गया है। हालांकि, अभी तक लीबिया की आधिकारिक सरकार या किसी स्वतंत्र वैश्विक एजेंसी ने इस खबर की पूरी तरह से पुष्टि नहीं की है। कुछ सूत्रों का कहना है कि यह एक घात लगाकर किया गया हमला था, जबकि अन्य इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं।

कौन था सैफ अल-इस्लाम? गद्दाफी का 'पढ़ा-लिखा' वारिस

मुअम्मर गद्दाफी के आठ बच्चों में सैफ अल-इस्लाम सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना जाता था। उसने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डॉक्टरेट की उपाधि ली थी और उसे गद्दाफी शासन का आधुनिक चेहरा माना जाता था।

2011 का विद्रोह: अपने पिता की मौत के बाद वह विद्रोहियों के हाथ लग गया था।

मौत की सजा: उसे एक समय मौत की सजा भी सुनाई गई थी, लेकिन बाद में उसे रिहा कर दिया गया।

राष्ट्रपति चुनाव की दौड़: हाल के वर्षों में वह लीबिया के राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहा था।

लीबिया की राजनीति पर क्या होगा असर?

अगर सैफ अल-इस्लाम की मौत की खबर सच साबित होती है, तो यह लीबिया के भविष्य के लिए एक बड़ा मोड़ होगा। गद्दाफी के वफादार आज भी लीबिया के एक बड़े हिस्से में प्रभाव रखते हैं और सैफ उनकी उम्मीदों का केंद्र था। उसकी कमी से लीबिया में एक बार फिर गृहयुद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है और सत्ता का संघर्ष और अधिक हिंसक हो सकता है।

विदेशी ताकतों की नजर और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

रूस और कई पश्चिमी देश लीबिया की स्थिरता में गहरी दिलचस्पी रखते हैं। सैफ अल-इस्लाम के रूस के साथ करीबी संबंधों की चर्चा हमेशा होती रही है। ऐसे में उसकी मौत की खबर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के समीकरणों को भी बदल सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया त्रिपोली से आने वाली आधिकारिक पुष्टि का इंतजार कर रही है।