एपस्टीन फाइल्स पर भूपेश बघेल का पीएम मोदी पर बड़ा हमला पूछा-दस्तावेजों में नाम आने पर भी भाजपा चुप क्यों?

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News India Live, Digital Desk : छत्तीसगढ़ की राजनीति में 'एपस्टीन फाइल्स' (Jeffrey Epstein Files) को लेकर नया बवाल शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में सार्वजनिक हुए दस्तावेजों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ का जिक्र करते हुए भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। बघेल ने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतने गंभीर दस्तावेज सामने आ रहे हैं, तो केंद्र सरकार और भाजपा इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख क्यों नहीं अपना रही है?

क्या है 'एपस्टीन फाइल्स' का विवाद? (What are Epstein Files?)

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने हाल ही में दिवंगत अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े लाखों पन्नों के दस्तावेज जारी किए हैं।

पीएम मोदी का नाम: इन फाइलों में एक ईमेल का हवाला दिया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2017 की इजरायल यात्रा का संक्षिप्त उल्लेख है।

भारत सरकार का रुख: भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन दावों को "एक सजायाफ्ता अपराधी की घटिया सोच" (Trashy Ruminations) बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह आधिकारिक यात्रा के तथ्यों के अलावा और कुछ नहीं है।

भूपेश बघेल के तीखे सवाल

भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया और मीडिया बयानों के जरिए भाजपा को घेरा:

भाजपा की चुप्पी पर सवाल: बघेल ने पूछा कि यदि दस्तावेजों में नाम आना महज एक संयोग या गलत है, तो भाजपा के बड़े नेता इस पर खुलकर सफाई क्यों नहीं दे रहे हैं?

दोहरा मापदंड: बघेल ने तंज कसा कि विपक्षी नेताओं पर मामूली आरोप लगने पर ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) सक्रिय हो जाती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे खुलासों पर सरकार मौन है।

हरदीप पुरी का जिक्र: बघेल ने इन फाइलों में भाजपा नेता हरदीप सिंह पुरी और एपस्टीन के बीच पुराने ईमेल संवादों के दावों का भी उल्लेख किया, जिन्हें लेकर विपक्ष पहले से ही हमलावर है।

भाजपा का पलटवार: "कांग्रेस फैला रही है भ्रम"

भाजपा नेताओं ने भूपेश बघेल के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे कांग्रेस की "हताशा की राजनीति" बताया है। भाजपा का कहना है कि:

एपस्टीन फाइल्स में किसी भी तरह के आपराधिक कृत्य या गलत व्यवहार का कोई सबूत नहीं है।

प्रधानमंत्री का नाम केवल एक आधिकारिक यात्रा के संदर्भ में लिया गया है, जिसका कोई कानूनी महत्व नहीं है।

कांग्रेस अपनी हार से ध्यान भटकाने के लिए अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रों का सहारा ले रही है।