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April 04 2026 11:30 pm

भगवंत मान का राघव चड्ढा पर बड़ा हमला बोले वो समझौता कर चुके हैं, पंजाब की सियासत में भूचाल

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News India Live, Digital Desk: पंजाब की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी ही पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मान ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि राघव चड्ढा 'कॉम्प्रोमाइज्ड' (समझौतावादी) हो चुके हैं। सीएम मान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर अंदरूनी कलह की खबरें पहले से ही चर्चा में थीं। मान के इस सीधे हमले ने साफ कर दिया है कि पंजाब 'आप' और दिल्ली दरबार के बीच सब कुछ ठीक नहीं है।

'जो डर गया वो मर गया': मान ने राघव चड्ढा को घेरा

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति में सिद्धांतों से समझौता करने वालों की कोई जगह नहीं है। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि कुछ लोग केंद्रीय एजेंसियों के डर से या निजी स्वार्थ के चलते झुक गए हैं। मान ने कहा, "राघव चड्ढा अब वो नहीं रहे जो पहले थे, उन्होंने सिस्टम के साथ समझौता कर लिया है।" यह पहली बार है जब भगवंत मान ने पार्टी के किसी इतने बड़े और कद्दावर नेता पर सार्वजनिक मंच से इस तरह का आरोप लगाया है।

दिल्ली और पंजाब 'आप' के बीच बढ़ती दूरियां

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि राघव चड्ढा और भगवंत मान के बीच पिछले काफी समय से शीतयुद्ध चल रहा था। राघव चड्ढा, जिन्हें कभी पंजाब सरकार का 'सुपर सीएम' कहा जाता था, पिछले कुछ महीनों से पंजाब के मामलों से कटे-कटे नजर आ रहे थे। मान के इस बयान ने उन अटकलों पर मुहर लगा दी है कि पंजाब की लीडरशिप अब दिल्ली के हस्तक्षेप को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। मान ने स्पष्ट किया कि पंजाब के फैसले अब पंजाब की धरती से ही होंगे।

क्या राघव चड्ढा पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई?

भगवंत मान के इस बयान के बाद अब सबकी नजरें पार्टी हाईकमान और अरविंद केजरीवाल पर टिकी हैं। क्या पार्टी राघव चड्ढा के खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाएगी या फिर मान को शांत करने की कोशिश की जाएगी? सूत्रों का कहना है कि मान के पास कुछ ऐसे इनपुट्स हैं जिनसे वह नाराज हैं। वहीं, विपक्षी दल कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने इस कलह पर चुटकी लेते हुए कहा है कि 'आप' का जहाज अब डूबने वाला है और इनके नेता एक-दूसरे की पोल खोल रहे हैं।

पंजाब की राजनीति पर क्या होगा असर?

भगवंत मान का यह आक्रामक रुख पंजाब में उनकी पकड़ को और मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है। वह जनता को यह संदेश देना चाहते हैं कि वह किसी भी बाहरी दबाव या 'समझौतावादी' नेता के आगे नहीं झुकेंगे। हालांकि, पार्टी के भीतर इस तरह की फूट आने वाले चुनावों में 'आप' के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। राघव चड्ढा की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह विवाद अभी और तूल पकड़ेगा।