Bengal Election 2026 : ममता का उत्तर और अभिषेक का दक्षिण, बंगाल फतह के लिए दीदी ने बिछाई नई बिसात, जानें क्या है TMC का मेगा प्लान
News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। सत्ता की हैट्रिक लगा चुकीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी कुर्सी बरकरार रखने और विपक्ष को चारों खाने चित करने के लिए अभी से कमर कस ली है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आगामी चुनाव के लिए एक ऐसी रणनीति तैयार की है, जिसमें अनुभव और युवा जोश का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। इस बार 'दीदी' ने बंगाल को दो हिस्सों में बांटकर चुनावी कमान संभालने का फैसला किया है, जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
ममता संभालेंगी उत्तर बंगाल का मोर्चा तृणमूल कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद उत्तर बंगाल के जिलों में चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगी। पिछले कुछ चुनावों में बीजेपी ने उत्तर बंगाल में मजबूत पैठ बनाई है, जिसे ढहाने के लिए दीदी ने खुद मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और अलीपुरद्वार जैसे जिलों में ममता बनर्जी की रैलियां और जनसभाएं जल्द ही शुरू होने वाली हैं। दीदी का लक्ष्य उत्तर बंगाल की खोई हुई जमीन वापस पाना और वहां के मतदाताओं को अपनी विकास योजनाओं से जोड़ना है।
दक्षिण बंगाल में 'युवराज' अभिषेक का दिखेगा दम वहीं, पार्टी के सेनापति और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को दक्षिण बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दक्षिण बंगाल टीएमसी का गढ़ माना जाता है, लेकिन यहां भी एंटी-इंकंबेंसी और स्थानीय मुद्दों को भांपते हुए अभिषेक बनर्जी को मोर्चा संभालने को कहा गया है। अभिषेक बनर्जी आधुनिक तकनीक और डेटा आधारित चुनाव प्रचार के लिए जाने जाते हैं। युवाओं को पार्टी से जोड़ने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से उनके कंधों पर होगी।
दोतरफा रणनीति से विपक्ष की घेराबंदी राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ममता और अभिषेक की यह जोड़ी 'डबल अटैक' की तरह काम करेगी। जहां ममता बनर्जी अपने भावनात्मक जुड़ाव और महिला वोटर्स के बीच लोकप्रियता का फायदा उठाएंगी, वहीं अभिषेक बनर्जी प्रशासनिक सुधारों और युवा आकांक्षाओं को भुनाने की कोशिश करेंगे। इस रणनीति के जरिए टीएमसी राज्य के हर कोने तक पहुंचना चाहती है, ताकि विपक्षी दल बीजेपी और लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन को संभलने का मौका न मिले।
संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी चुनाव प्रचार शुरू करने से पहले टीएमसी के भीतर बड़े संगठनात्मक बदलावों की भी सुगबुगाहट है। खराब प्रदर्शन करने वाले नेताओं की छुट्टी की जा सकती है और नए चेहरों को आगे लाया जा सकता है। ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि 2026 की राह आसान नहीं है, इसलिए हर कार्यकर्ता को अभी से चुनावी मोड में आना होगा। सरकारी योजनाओं जैसे 'लक्ष्मी भंडार' और 'द्वारे सरकार' को घर-घर पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।